एक साल पहले शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने एकता के लिए अपना एक हाथ आगे बढ़ाया था तब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना अध्यक्ष राज ठाकरे ने अपने हाथ पीछे खींच लिए थे। भाजपा-शिवसेना की 25 साल पुरानी दोस्ती टूटने के बाद उद्धव ठाकरे ने फिर अपने चचेरे भाई राज ठाकरे को फोन कर साथ आने का न्योता दिया। चुनाव के बाद क्या स्थिति बनेगी इस पर राज ठाकरे मौन हैं। महाराष्ट्र के चुनावी परिदृश्य और भावी राजनीति पर राज ठाकरे से सुरेंद्र मिश्र की बातचीत:-
:- भाजपा-शिवसेना गठबंधन टूटने के बाद आपकी शिवसेना से गठबंधन की चर्चा थी। सचाई क्या है?
:- यह सही बात है। भाजपा से गठबंधन टूटने के बाद उद्धव ठाकरे ने मुझे फोन किया था। उन्होंने तीन विकल्प बताए थे। पहला एक साथ चुनाव लड़ें। दूसरा अलग-अलग चुनाव लड़ने के दौरान एक दूसरे पर टीका-टिप्पणी न करें और तीसरा चुनाव के बाद की जैसी परिस्थिति रहेगी उसके अनुसार समीकरण तय किया जाए। मैं तैयार था लेकिन उसके बाद मातोश्री से कोई प्रतिसाद नहीं मिला। फिर हमने एबी फार्म बांटने शुरू कर दिए।
'मैं मोदी की गुजराती मानसिकता के खिलाफ'
:- लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के तारीफ के पुल बांधते थे। अब क्या हो गया?
:- मैं आज भी नरेंद्र मोदी का प्रशंसक हूं। मैंने तब उन्हें प्रधानमंत्री बनने की बात कही थी जब भाजपा में उनका नाम भी नहीं चल रहा था।
:- जब आप उनके प्रशंसक हैं तो विरोध क्यों?
:- प्रशंसा इसलिए कर रहा हूं कि वे अच्छे प्रशासक हैं। भ्रष्टाचार का कोई धब्बा नहीं है लेकिन दिक्कत यह है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद भी वे गुजरात से आगे नहीं निकल पा रहे हैं। अब मोदी केवल गुजरात के नहीं हैं पूरे देश के प्रधानमंत्री हैं। इसलिए मैं उनकी गुजराती मानसिकता के खिलाफ हूं।
क्या हुआ तेरा वादा?
:- सीमा पर हो रही गोलीबारी को राजनीतिक मुद्दा बनाने का क्या औचित्य है?
:- औचित्य है। जब केंद्र में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने तब नितिन गडकरी ने एक टीवी चैनल पर पाकिस्तान से बात करते हुए कहा था कि अब कांग्रेस सरकार नहीं है जो सब कुछ सहन करती रहेगी। उस वादे का क्या हुआ।
:- क्या प्रधानमंत्री को अपनी पार्टी का प्रचार नहीं करना चाहिए?
:- मेरा चुनावी जनसभा का विरोध नहीं है। वे चाहे 20 सभाएं करें या 40 सभाएं। मेरा सवाल यह है कि ऐसे समय में उन्हें हेडक्वार्टर में बैठना चाहिए या सभाएं करनी चाहिए।
:- चुनाव के बाद यदि गठबंधन की नौबत आई तो आप किस पार्टी के साथ जाना पसंद करेंगे।
:- हमारी पसंद महाराष्ट्र की जनता है। अगर-मगर का मैं जवाब नहीं देता क्योंकि क्या स्थिति बनेगी किसी को पता नहीं है।
'कोई गुंडा आए तो बिल्कुल सहन नहीं करूंगा'
:- शिवसेना ने मराठी मुद्दे को धार दे दी है। बार-बार यह कह रही है कि भाजपा ने उनकी पीठ में छुरा भोंका है। आपका क्या मत है?
:- पहली बात मराठी जनता किसी पार्टी की जागीर नहीं है। दूसरी बात यह है कि किसी ने किसी की पीठ में छुरा नहीं भोंका है। मुझे छह महीने पहले ही पता था कि गठबंधन नहीं होगा।
:- आप की छवि उत्तर भारतीय विरोधी है। फिर भी आपने एक उत्तर भारतीय को उम्मीदवार बनाया है। क्या राज ठाकरे में बदलाव आ गया है?
:- मैंने कभी उत्तर भारतीयों का विरोध नहीं किया। यहां जो रहते हैं वे महाराष्ट्र की मिट्टी और संस्कृति में घुलमिल चुके हैं। हमारे आंदोलन के समय हिंदी चैनलों ने मेरी भूमिका को गलत तरीके से पेश किया। मैं यूपी-बिहार ही नहीं किसी राज्य का विरोधी नहीं हूं। उत्तर प्रदेश से यदि मुंशी प्रेमचंद या हरिवंश राय बच्चन जैसे लोग आएं तो उनका रेड कार्पेट बिछाकर स्वागत करूंगा, लेकिन यदि कोई आजमगढ़ या प्रतापगढ़ का गुंडा आए तो बिल्कुल सहन नहीं करूंगा।
:- क्या चुनाव बाद राज और उद्धव के बीच तालमेल की संभावना है?
:- मेर लिए फिलहाल यह विषय खत्म हो चुका है।