आपातकाल की आशंका वाले बयान पर विवाद खड़ा होने के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने शुक्रवार को साफ किया कि उनका बयान व्यक्तिगत तौर पर किसी के लिए नहीं था।
हालांकि उन्होंने कहा कि वह राजनीतिक दलों में ‘वन मैन शो’ के खिलाफ हैं। उन्होंने नेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की तरह शालीन होना चाहिए।
एक चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि ‘जब मैंने ऐसा बयान दिया तो मेरा मतलब किसी व्यक्ति विशेष से नहीं था। मैं सभी तरह की तानाशाही का विरोध करता हूं।’ आडवाणी ने कहा, ‘अहंकार निरंकुशता को जन्म देता है। यह बहुत दुख देने वाला है। आज के नेताओं को वाजपेयी की तरह शालीन होना चाहिए।’
पिछले दिनों एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में आडवाणी ने कहा था, ‘फिलहाल लोकतंत्र को कुचल सकने वाली ताकतें अधिक मजबूत हैं’। इस बयान का जिक्र करते हुए जब आडवाणी से पूछा गया कि क्या यह मौजूदा परिप्रेक्ष्य में की गई टिप्पणी थी तो आडवाणी ने किसी भी तरह की अटकलों को खारिज कर दिया।
सत्ता का दुरुपयोग करने वालों को सबक सिखाएंगे मतदाता
आडवाणी ने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि क्या मैंने ज्यादा मजबूत कहा था। मैंने केवल मजबूत कहा था। मुझे हैरानी इस बात की होती है या इस बात से कष्ट होता है कि जिन्होंने देश में इतना भयावह आपातकाल लगाया था, उन्हें इसके लिए कोई अपराधबोध नहीं है। मुझे इससे कष्ट होता है।’
भाजपा नेता ने कहा कि भारत में दूसरी बार आपातकाल आसानी से नहीं लगाया जा सकता लेकिन उन्होंने आगाह करते हुए यह भी कहा, ‘जिनके पास सत्ता है या जो सत्ता में आ सकते हैं, उनके पथभ्रष्ट होने की संभावना हमेशा अधिक होगी।’ उन्होंने आगाह किया कि जो भी सत्ता का दुरुपयोग करेगा, मतदाता उसे सबक सिखाएंगे।
जब आडवाणी से पूछा गया कि अगर कोई नेता सत्ता को लेकर भुलावे में रहता है या अपने अधिकारों का दुरुपयोग करने की इच्छा रखता है, तो क्या भारतीय मतदाता ऐसे राजनेता को सबक सिखाएंगे, तो आडवाणी का जवाब था, ‘सही।’ उन्होंने कहा, ‘जो भी सत्ता में आता है, वह उसे खोना नहीं चाहता। जिस तरह किसी को धन मिलता है तो वह उसे खोना नहीं चाहता।’