आतंकियों की घुसपैठ के मामले में भारत - पाकिस्तान नियंत्रण रेखा (एलओसी) की तुलना में अंतरराष्ट्रीय सीमा अधिक संवेदनशील है।
एलओसी पर सेना की तैनाती है जबकि बार्डर की सुरक्षा बीएसएफ के हवाले है। आतंकियों की घुसपैठ के लिए पाकिस्तान सेना कवर फायरिंग के तहत सीजफायर का उल्लंघन करती है।
सीजफायर उल्लंघन की घटनाएं बार्डर पर अधिक होती है। तस्करी के मामले भी बार्डर से ही ज्यादा दर्ज होते रहे हैं। पाकिस्तान के लिए जासूसी के मामले में बीएसएफ के सेवानिवृत और कार्यरत कर्मियों समेत 34 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर के राज्यपाल एनएन वोहरा ने पठानकोट हमले के संदर्भ में बार्डर पर सुरक्षा कमियों की ओर इशारा किया है।
एलओसी पर तारबंदी भारतीय सीमा के अंदर है। तारबंदी से एक -दो किलोमीटर आगे भारतीय फौज के अग्रिम पोस्ट हैं। वहां सेना की पेट्रोलिंग लगातार होती है और 24 घंटे युद्ध क्षेत्र मानकर सुरक्षा व्यवस्था सेना के जवानों के हवाले है। एलओसी से घुसपैठ की स्थिति के अधिकांश मामलों में आतंकी मारे जाते हैं या फिर उन्हें वापस खदेड़ दिया जाता है।