सांसद राम जेठमलानी और उनके बेटे महेश जेठमलानी तथा कर्नाटक से पार्टी नेता जगदीश शेट्टीगर के बाद यशवंत सिन्हा के इस खुले विद्रोह से जाहिर है कि गडकरी के सवाल पर भाजपा में अंदरूनी घमासान जारी है। संसद में यूपीए सरकार को घेरने की तैयारी में जुटी भाजपा शीतकालीन सत्र के ठीक दो दिन पहले आए सिन्हा के बयान से खुद ही उलझ गई है।
भाजपा नेता यशवंत सिन्हा के पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी पर दिए बयान से भाजपा का अंदरूनी घमासान फिर सामने आ गया है। इस आंतरिक कलह के चलते भ्रष्टाचार, महंगाई, कालाधन समेत विभिन्न मुद्दों पर यूपीए सरकार के खिलाफ भाजपा के अभियान की धार कुंद पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
खास बात यह है कि विभिन्न मुद्दों पर भाजपा बुधवार को केंद्र सरकार के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन के तहत सड़कों पर उतरने जा रही है, लेकिन मंगलवार को सिन्हा ने गडकरी के इस्तीफे की मांग के साथ ही कार्यकर्ताओं से भी अपनी इस मांग का समर्थन करने की अपील कर भाजपा को संकट में डाल दिया। सिन्हा के इस बयान से पार्टी की आंतरिक कलह तेज होने की भी आशंका है।
गडकरी का इस्तीफा मांगने के सिन्हा के कदम से यह भी साफ जाहिर हो रहा है कि भाजपा की आंतरिक कलह को सुलझाने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तमाम कोशिशों के बावजूद असहाय नजर आ रहा है। इससे पहले दो बार गडकरी के खिलाफ उठे विद्रोह के सुर को थामने के लिए संघ ने सीधी दखल दी थी और उसके बाद पार्टी की ओर से गडकरी के अध्यक्ष पद पर काबिज रहने का बयान जारी किया गया। मगर सिन्हा ने यह सवाल फिर से उठाकर भाजपा ही नहीं संघ की चुनौती में भी इजाफा कर दिया है।