लोकसभा चुनावों के महासमर में बंगलूरू की चार सीटों पर हाई प्रोफाइल उम्मीदवारों के बीच मुकाबला रोचक होता दिख रहा है।
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बंगलूरू दक्षिण से कांग्रेसी उम्मीदवार व इनफोसिस के पूर्व सह संस्थापक नंदन नीलेकणी अपनी पहली चुनावी जंग जीतने के लिए पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरीकों का इस्तेमाल करने में जुटे हैं।
जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी और इस सीट पर पिछले दो
बार से सांसद रहे भाजपा के अनंत कुमार ने अपने प्रचार को पूरी तरह से मोदीमय कर दिया है। नीलेकणी पारंपरिक तरीके के अनुसार लोगों के साथ बैठकें कर रहे हैं और आम सभाएं कर रहे हैं।
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जबकि उनके साइबर योद्धा सोशल मीडिया पर मोर्चा संभाले हैं। इन लोगों ने पहले से ही बड़ी संख्या में वोटरों का डाटाबेस बना लिया है। जबकि कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की एक लाख लोगों से निजी तौर पर मिलने की योजना भी है।
एक कार्यकर्ता ने बताया कि नीलेकणी पूरी तरह से स्थानीय प्रचार चला रहे हैं और वोटरों से अनंत कुमार को हटाने का आह्वान कर रहे हैं क्योंकि उन्होंने बंगलूरू दक्षिण के लिए बहुत ही कम काम किया है।
सोशल मीडिया पर रोचक जंग
सोशल मीडिया पर भी नीलेकणी बेहद रोचक अभियान चलाए हुए हैं। इस सीट के करीब चार लाख वोटर फेसबुक और ट्विटर पर हैं।
कार्यकर्ताओं ने बताया कि मतदाताओं में जागरूकता फैलाने के लिए हम हर सप्ताह सर्वे करा रहे हैं ताकि पिछले दो महीने में नीलेकणी के बारे में जागरूकता में हुई बढ़ोतरी का पता लगाया जा सके।
हमने 30 प्रतिशत जागरूकता के साथ शुरुआत की थी, जो अब बढ़कर 75 फीसदी हो चुकी है। दूसरी तरफ अनंत कुमार पूरी तरह से मोदी की शरण में दिखाई दे रहे हैं। उनकी सभाओं में जो पर्चे बंट रहे हैं, उसमें वह खुद को ‘मोदी अनंत कुमार’ बता रहे हैं।
बंगलूरू सेंट्रल पर भी अमूमन यही हाल है। कांग्रेस के रिजवान अरशद मौजूदा भाजपा सांसद पीसी मोहन को चुनौती दे रहे हैं। मोहन भी यहां पर मोदी के नाम पर ही वोट मांग रहे हैं।
मुस्लिम सीट पर रिजवान को फायदा
मुस्लिम बहुल सीट के चलते यहां से रिजवान को फायदा हो सकता है। इस सीट पर 17 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं। हालांकि आप उम्मीदवार और इनफोसिस के पूर्व निदेशक वी बालाकृष्णन कांग्रेस और भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं।
आत्मविश्वास से भरपूर बालाकृष्णन ने कहा, ‘मैं खुद को एक स्वच्छ छवि वाले उम्मीदवार के रूप में पेश कर रहा हूं, जो स्थानीय लोगों के लिए 24 घंटे काम करेगा।
अरविंद केजरीवाल ने नई तरह की राजनीति का आगाज किया है। मुझे पूरा यकीन है कि जीत हासिल कर मैं सभी को चौंका दूंगा।’ साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव लड़ने के लिए बहुत सारा पैसा होने की जरूरत नहीं है।
हमें शहरी स्लम के बारे में प्राथमिकता से कुछ करने की जरूरत है। इस सीट पर 4 लाख से ज्यादा इसी तरह के स्लम में रहते हैं।
गौड़ा और नारायणस्वामी के बीच मुकाबला
बंगलूरू उत्तर लोकसभा सीट पर भाजपा के पूर्व सीएम सदानंद गौड़ा और कांग्रेस के सी नारायणस्वामी के बीच मुकाबला है, जिन्हें पार्टी ने प्राथमिकता के आधार पर चुना है।
बंगलूरू ग्रामीण सीट पर हाल ही में हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने जेडीएस से यह सीट छीन ली थी और कांग्रेस उम्मीदवार डीके सुरेश इस बार भी काफी मजबूत दिख रहे हैं।
बंगलूरू से 80 किमी दूर चिकबलपुर में भी मुकाबला हाई प्रोफाइल उम्मीदवारों के बीच है।
इस सीट पर केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली का मुकाबला पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के बेटे व जेडीएस नेता कुमारस्वामी से है। इसी वजह से मुकाबला बेहद रोचक होने की उम्मीद है।
आंध्र प्रदेश सीमा के पास की लोकसभा सीटों पर भी बड़ी जंग देखने को मिलेगी, जहां रेड्डी बंधुओं का दबदबा है। विवादों के बीच में भाजपा ने हाल ही में दागी बी श्रीरामुलु को पार्टी में शामिल किया था।
दलित समुदाय में खासे प्रभावी श्रीरामुलु के पास करीब 4 फीसदी वोट हैं। भाजपा के स्टार उम्मीदवार और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा अपने गढ़ शिमोगा में दम दिखाएंगे, जहां से उनका जीतना लगभग तय ही माना जा रहा है।