मेरठ में डॉक्टरों की क्रूरता सामने आई है। मेरठ के लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में रीना (बदला हुआ नाम) डिलिवरी के लिए अस्पताल में भर्ती हुई थी।
यहां उसके साथ ऐसा अमानवीय व्यवहार किया गया।। वहां के डॉक्टरों ने उसके बेड पर एक पोस्टर चिपका दिया जिस पर लिखा हुआ था कि वो Bio Hazard +VE से पीड़ित है।
यहां तक की उसके बेड पर एड्स के निशान का रेड रिबन भी लगा दिया था। उसके साथ इतना गंदा दुर्व्यवहार किया गया कि डिलिवरी के बाद तीन दिन बाद डॉक्टर ने उसके टांके तो काट दिए लेकिन उसे उसकी सफाई खुद ही करनी पड़ती थी।
डॉक्टरों ने किया गंदा व्यवहार
डॉक्टर केवल यहीं तक नहीं रुके वरन् उन्होंने रीना पर यह भी आरोप लगा दिया कि ''उसने इस बीमारी से पीड़ित एक और बच्चा जन्म दे दिया है।'' डॉक्टरों द्वारा उसके बेड पर एचआईवी का लिखित पैम्फलेट लगा देने की वजह से रीना के जो भी रिश्तेदार मिलने आते हैं, तो वे भी उससे दूरियां बना रहे हैं।
जब यह खबर केयर सपोर्ट सेंटर तक पहुंची जो एचआईवी पीड़ितों के अधिकार के लिए लड़ने वाली टीम से रितु सक्सेना और विनिता देवी पहुंची। जब वो वहां पहुंची तब भी वो पैम्फलेट उनके बेड पर लटक रहा था।
विनिता ने बताया कि वहां पहुंचते ही उन्होंने उस पैम्फलेट को फाड़ दिया और इस मामले के बड़ा होते देख अस्पताल प्रशासन डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश कर रहा है।
पति से मिली बीमारी
(फोटो में रीना के बेड पर लगाया गया पैम्फ्लेट)
अस्पताल प्रशासन ने कहा कि वो इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के लिए रीना से माफी मांगने को तैयार है। अस्पताल की डॉक्टर अभिलाषा गुप्ता ने कहा कि मैं यह समझ सकती हूं कि नहीं होना था, और जिन डॉक्टरों ने ये काम किया है उन्होंने लिखित में अपनी गलती मान ली है।
रीना ने बताया कि वो उसे यह रोग 8 साल पहले अपने पति की वजह से हुआ था और इसे एकदम गोपनीय रखा गया था। रीना ने रोते हुए कहा कि डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से यह जानकारी लोगों को पता चल गई।
लोगों की बाते सिर्फ मुझे नहीं सुननी होती बल्कि लोग मेरी बेटी को भी कहते हैं कि यह 'खतरनाक बीमारी' से ग्रसित बच्ची है। केयर सपोर्ट सेंटर के समन्वयक बद्री सिंह ने कहा कि उन्होंने लाला लाजपत राय मेमोरियल हास्पिटल के नोडल अधिकारी को इस संबंध में पत्र लिखा है।