खरखौदा निवासी जब्बार (काल्पनिक नाम) की बेटी का तलाक महंगाई की वजह से लटका गया है। एक ओर वह बेटी का घर टूटने से दुखी हैं, तो दूसरी ओर उन्हें फिक्र सता रही है कि तलाक के बाद बेटी की दूसरी जगह शादी कैसे कर पाएंगे। 5 साल पहले जब उन्होंने बेटी की शादी की थी, तब दहेज के सामान की कीमत आज के मुकाबले तीन गुना कम थी। बेटी के ससुरालवाले तलाक के बाद शादी के समय के रेट के हिसाब से खर्च वापस करना चाहते हैं जबकि जब्बार वर्तमान रेट के लिहाज से खर्च वापस मांग रहे हैं। इसी बात पर तलाक लटका हुआ है।
मेरठ जिले के खरखौदा निवासी जब्बार की बेटी शगुफ्ता (परिवर्तित नाम) की शादी 2007 में भोजपुर निवासी अकील (बदला हुआ नाम) से हुई थी। कुछ दिन पहले शगुफ्ता ने अकील पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए एसएसपी से शिकायत की। एसएसपी ने महिला थाने में दोनों पक्षों की काउंसलिंग करने के निर्देश दिए। काउंसलिंग में ये बात सामने आई कि दोनों तलाक चाहते हैं। दोनों के परिवारवाले इस पर राजी हो गए। बात आई शादी में खर्च की। शगुफ्ता के ससुरालवाले बोले कि शादी में 2 लाख रुपये खर्च हुए थे, वे वापस करने को तैयार हैं। लेकिन मायकेवाले नहीं माने।
पुलिस ने पूछा तो जब्बार बोले कि जब उन्होंने बेटी की शादी की थी तब सोने की कीमत करीब 11, 500 रुपये प्रति 10 ग्राम थी, जबकि आज सोने की कीमत 32,500 रुपये प्रति 10 ग्राम है। यही हाल चांदी का है। चांदी तब करीब 17 हजार प्रति किलो थी और अब 63 हजार रुपये प्रति किलो है। पेट्रोल तब करीब 42 रुपये लीटर था, अब 74 रुपये से ज्यादा है। दहेज में जो सामान दिया गया था, उसकी कीमत अब कई गुना बढ़ चुकी है। लिहाजा वे कैसे राजी हो जाएं? उन्हें बेटी की दूसरी शादी करनी है, तो कैसे करेंगे? उन्हें 5 लाख रुपये चाहिए। उनके तर्क को सुनकर पुलिसवाले भी पसोपेश में हैं।
तलाक का ये मामला महंगाई की वजह से लटका हुआ है। ससुरालवाले शादी के समय का खर्च लड़की पक्ष को देने को राजी हैं, जबकि लड़कीवाले आज की महंगाई के हिसाब से खर्च वापस मांग रहे हैं। समझौते के प्रयास जारी हैं। - अंजू तेवतिया, महिला थाना एसओ