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भारत पाक भांप रहे एक दूसरे का रुख, एनएसए बातचीत पर असमंजस कायम

Sun, 09 Aug 2015 09:58 AM IST
गुंजन कुमार/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत पाकिस्तान के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) स्तर की बातचीत के एजेंडे को अंतिम रुप देने से पहले उसके रुख को बारीकी से भांप रहा है।
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एजेंडे का मसौदा तैयार कर रहे सरकारी विशेषज्ञों का मानना है कि गुरदासपुर और उधमपुर आतंकी हमले के डोजियर तैयार करने की खबर के बाद पाकिस्तान भी कश्मीर के साथ बलूचिस्तान और नौर्थ वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस (एनडब्लूएफपी) का मुद्दा उठाएगा।

पाकिस्तान पिछले साल भर से कई मंच पर इन इलाकों में हिंसा फैलाने के लिए भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ पर उंगलियां उठा चुका है। उच्चपदस्थ सरकारी सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि पाक सेना और आईएसआई के दबाव में नवाज शरीफ सरकार कश्मीर के साथ बलूचिस्तान और एनडब्लूएफबी को भी प्रोपगंडा के तौर पर उठा सकती है।
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पाक की ओर से कोई संकेत नहीं

ताकि गुरदासपुर और उधमपुर आतंकी हमले में पाकिस्तान के खिलाफ मिले सटीक सबूतों के भारत के दावों को कमजोर किया जा सके।

सूत्रों ने बताया कि इन हमलों के बाद पाकिस्तान ने अबतक कोई संकेत नहीं दिया है कि वह इस मुलाकात के लिए किस हद तक गंभीर है।

हालांकि रुस के उफा में दोनों प्रधानमंत्रियों की मुलाकात के बाद तय हुए कार्यक्रम में पाकिस्तान ने खासी तत्परता दिखाई थी। गौरतलब है कि भारत ने गुरदासपुर हमले के बावजूद बातचीत के लिए 24-25 अगस्त की तारीख का प्रस्ताव पाक को दिया था।

डोजियर के साथ शुरु करे बातचीत!

लेकिन इस प्रस्ताव के बाद उधमपुर हमला हो गया जिसमें पाकिस्तान से भेजा गया जिंदा आतंकी पकड़ा गया। सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान ने तारीख के प्रस्ताव का अबतक कोई जवाब नहीं दिया है।

पूर्व गृह सचिव जी के पिल्लै के मुताबिक एनएसए अजीत दोभाल और उनके पाकिस्तानी समकक्ष सरताज अजीज को डोजियर के साथ भी बातचीत की शुरुआत कर देनी चाहिए।

26 दिसंबर 2008 हमले से उपजे तनातनी के बाद 2011 में पहली बार भारत पाक गृहसचिव स्तर की बातचीत के सूत्रधार रहे पिल्लै ने आगाह किया है कि पाकिस्तान नरेंद्र मोदी सरकार की संसद की बढ़ी चुनौती और आर्थिक विकास के जोर नहीं पकड़ने का भी आकलन कर रहा होगा।
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हो सकते हैं सकारात्मक परिणाम

पिल्लै ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि अगर दोनों पक्ष वाकई गंभीर है तो यह बातीचत सार्वजनिक नहीं होनी चाहिए। सार्वजनिक मंच पर कूटनीति की बात आने से वार्ता विरोधी गुटों को मौका मिलता है।

पिल्लै के मुताबिक बातचीत की शुरुआत कर बैकचैनल के जरिए दोनों एक दूसरे का यकीन जीतने के उद्देश्य से आगे बढ़े तो सकारात्मक परिणाम हो सकते हैं।

26/11 को लेकर पाकिस्तान के पास सबूतों की कमी नहीं है। पाकिस्तान सरकार इसके आरोपियों को सजा दिलाकर भारत का यकीन जीतने की शुरुआत कर सकता है।
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