दशकों से सीमा विवाद में उलझे भारत और चीन ने रिश्तों को नया आयाम देने की दिशा में बुधवार को एक बार फिर कदम बढ़ा दिया। दोनों देशों ने सीमा पर तनाव बढ़ने से रोकने और इस तनाव की वजह से संबंधों को बिगड़ने से बचाने के लिए एक अहम करार किया है।
इसके तहत दोनों पक्ष अब एलएसी पर आमने सामने आने पर भी झगड़ा नहीं, बल्कि सुलह की बात करेंगे। दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ सैन्य ताकत का इस्तेमाल भी नहीं करेंगे। दोनों देशों ने ब्रह्मपुत्र व अन्य साझा नदियों पर सहयोग का भी एक करार किया।
हालांकि दोनों देशों के बीच संबंधों में खटास की बड़ी वजह रहे नत्थी वीजा विवाद का मुद्दा नहीं सुलझ पाया। भारत ने चीन की नत्थी वीजा नीति का विरोध करते हुए वीजा संबंधों को उदार करने के समझौते पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनके चीनी समकक्ष ली केचियांग के बीच लंबी बातचीत के बाद सीमा रक्षा सहयोग समझौते (बीडीसीए) समेत कुल नौ समझौतों पर मुहर लगाई गई। हाल में हुई चीनी घुसपैठों के मद्देनजर अहम माने जा रहे बीडीसीए के तहत दोनों देश वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर एक-दूसरे के जवानों को गश्त करने से नहीं रोकेंगे।
4000 किमी लंबी एलएसी पर सभी सेक्टरों में दोनों देशों के बीच हॉट लाइन स्थापित की जाएंगी। साथ ही दोनों देशों सैन्य मुख्यालय भी हॉट लाइन के जरिए संपर्क में रहेंगे। लेकिन चीन की तमाम कोशिशों के बावजूद भारत ने वीजा संबंधों को उदार करने के समझौते पर फिलहाल हस्ताक्षर करने से मना कर दिया।
अरुणाचल प्रदेश के दो तीरंदाजों को नत्थी वीजा देने की हाल में हुई घटना से भारत नाराज है। जब विदेश सचिव सुजाता सिंह से पूछा गया कि क्या चीन ने भविष्य में नत्थी वीजा नहीं देने का कोई आश्वासन दिया है तो उन्होंने सिर्फ यही कहा कि इस पर चर्चा हो रही है।
इससे पहले दोनों प्रधानमंत्रियों ने एक साल के अंदर हुई अपनी इस दूसरी मुलाकात के बाद कहा कि नए समझौतों से दोनों मुल्कों के रिश्तों को नई ऊंचाइयां मिलेंगी। सीमा समझौते को मील का पत्थर बताते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि इससे सीमा पर शांति और स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।
शांति और स्थिरता ही दोनों देशों के संबंधों के विकास का आधार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों में इस बात पर सहमति है कि भारत और चीन की 2.5 अरब जनता की प्रगति एशिया और दुनिया की समृद्धि और स्थिरता की मुख्य वजह होगी।
मनमोहन ने यह भी कहा कि भारत चीनी नागरिकों की भारत यात्रा को आसान बनाने के लिए वीजा नियमों को उदार बनाने के लिए वचनबद्ध है। उन्होंने चीन से भी इस दिशा में कदम उठाने की उम्मीद जताई।
लेकिन सीमा पर ढांचा मजबूत करता रहेगा भारत
बीडीसीए के तहत एलएसी के पास किसी भी तरह के निर्माण के अधिकार पर रोक नहीं लगाई गई है। जयशंकर ने कहा कि समझौते में समान सुरक्षा का विशेष जिक्र किया गया है। जिससे साफ है कि दोनों पक्ष अपनी जरूरतों के लिहाज से अपना सुरक्षा ढांचा खड़ा कर सकते हैं।
पीएम का गर्मजोशी से हुआ स्वागत
चीन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का बड़ी ही गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया। उन्हें खाने में चीनी व्यंजन परोसे गए तो बॉलीवुड की धुनें भी बजाई गईं। इस स्वागत से खुश मनमोहन ने भी चीनी पीएम ली केचियांग को भारत आने का न्योता देने में देर नहीं की।
इन क्षेत्रों में भी किए करार
रक्षा सहयोग, सड़क परिवहन, साझा नदियों पर, बिजली उपकरणों, सांस्कृतिक आदान प्रदान
सीमा रक्षा सहयोग समझौते के प्रावधान
1. दोनों देशों में से कोई भी अपनी सैन्य ताकत का इस्तेमाल दूसरे के खिलाफ नहीं करेगा और न ऐसा करने की धमकी देगा
2. दोनों पक्ष बीडीसीए को बिना किसी पूर्वाग्रह के एलएसी और सीमा पर लागू करेंगे
3. एलएसी पर विश्वास बहाली के उपायों के तहत दोनों देशों के सैन्य मुख्यालय के बीच हॉटलाइन स्थापित की जाएगी
4. दोनों देश एलएसी पर विवादित इलाकों में एक-दूसरे के जवानों को गश्त करने से नहीं रोकेंगे और न ही पीछा करेंगे
5. यदि दोनों देशों के जवान एलएसी पर कहीं आमने सामने आ जाते हैं तो दोनों पक्ष पूरा संयम बरतेंगे
6. ऐसी स्थिति में दोनों पक्ष उकसावे की कार्रवाई से बचेंगे और एक-दूसरे के साथ सम्मान से पेश आएंगे
7. 4000 किमी लंबी एलएसी पर दोनों पक्षों के बीच हर सेक्टर में हॉट लाइन स्थापित की जाएगी