भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अंतरिक्ष रॉकेट पीएसएलवी-सी20 से भारत-फ्रांस के समुद्र विज्ञान अध्ययन उपग्रह सरल और छह विदेशी लघु एवं सूक्ष्म उपग्रहों का सोमवार को सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया गया।
करीब छह बजे शाम को ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण रॉकेट (पीएसएलवी) सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के पहले लांच पैड से रवाना हुआ। रवाना होने के 22 मिनट बाद ही उसने उपग्रहों को कक्षाओं में स्थापित कर दिया।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी चेन्नई से करीब 110 किलोमीटर दूर स्थित मिशन कंट्रोल सेंटर से प्रक्षेपण के इस ऐतिहासिक क्षण के गवाह बने। इसरो के सूत्रों के अनुसार रॉकेट प्रक्षेपण को करीब पांच मिनट के लिए टाला गया।
ऐसा इस लिए किया गया जिससे कि अंतरिक्ष में तैरते मलबे से पीएसएलवी-सी20 के टकराने की संभावना को टाला जा सके। सूत्रों के अनुसार यह किसी प्रक्षेपण अभियान का एक सामान्य एहतियाती कदम है।
फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी सीएनईएस के पेलोड आरगोस और अल्तिका के साथ 410 किलो वजन वाला उपग्रह सरल समुद्र के विभिन्न पहलुओं के अध्ययन में मदद करेगा। इससे समुद्र की स्थिति की समझ बेहतर करने में मदद मिलेगी।
सरल के अलावा, आस्ट्रिया के दो सूक्ष्म-उपग्रह ‘यूनीब्राइट’ और ‘ब्राइट’, डेनमार्क का ‘एएयूएसएटी-3’ और ब्रिटेन के ‘स्ट्रैंड’ के अलावा कनाडा का एक सूक्ष्म-उपग्रह नियोससैट और एक छोटा-उपग्रह सैफायर भी पीएसएलवी से प्रक्षेपित किया गया।
इस प्रक्षेपण के साथ ही पीएसएलवी ने लगातार 23 सफल प्रक्षेपणों का अपना सिलसिला पूरा कर लिया है। इस क्रम में पहला अभियान विफल रहा था। पीएसएलवी ने प्रक्षेपण के करीब 18 मिनट बाद, सबसे पहले सरल को अंतरिक्ष में छोड़ा। इसके बाद चार मिनट के अंतराल में एक के बाद एक उपग्रह छोड़े गए।