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इराक: दंपति की आखों देखी हैवानियत

Sat, 21 Jun 2014 02:08 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जानीखुर्द (मेरठ)
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जियारत के लिए इराक गए लोग जान पर खेलकर यात्रा पूरी कर रहे हैं। जानी क्षेत्र के गांव रसूलरपुर धौलड़ी निवासी एक दंपति इराक में बम धमाकों के बीच अपनी जियारत पूरी कर शुक्रवार दोपहर गांव लौटा है।
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दंपति ने इराक में धार्मिक स्थलों की रक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर विद्रोहियों के खिलाफ लड़ाई में शामिल होने की बात कही है।

मेरठ के रहने वाले हैं ये

गांव रसूलपुर धौलड़ी निवासी अली नफीस काजमी अपनी पत्नी हसमत जहरा के साथ 31 मई को इराक गए थे। उनके 30 सदस्यीय दल में मवाना निवासी मोहम्मद नकी हुसैन भी शामिल थे।

सबसे पहले उन्होंने करबला में इमाम हुसैन के रोजा पर जियारत की। इसके दो दिन बाद वह अलनजफ लौट आए। नफीस काजमी ने बताया कि सात जून को उनके निवास के पास विद्रोहियों द्वारा किए गए बम धमाके में 52 लोगों की मौत हो गई।

इसके बाद पूरे शहर को सेना ने अपने कब्जे में ले लिया। सेना ने उनसे जियारत बंद कर अपने देश लौट जाने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने जियारत पूरी करने की ठान ली।

जगह-जगह दिखा संघर्ष का मंजर

दो दिन बाद वह सेना की भारी चेकिंग के बीच कार से जियारत के लिए इराक के विभिन्न शहरों में पहुंचे। इस दौरान उन्हें जगह-जगह बम धमकों से धवस्त इमारतें और सड़कें नजर आईं।

सेना ने जियरात के लिए उनकी पूरी सहायता की। 12 जून को वहां हालात पूरी तरह खराब हो गए। इस पर उन्होंने भारत लौटने का निर्णय लिया। अलनजफ से वह कार से बगदाद पहुंचे।

15 जून की रात को बगदाद से हवाई जहाज से वह राजधानी तेहरान पहुंचे। बृहस्पतिवार रात वह तेहरान से चले और शुक्रवार सुबह दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरकर ने रसूलपुर धौलड़ी आ गए।

दूधमुंहे बच्चों को भी नहीं छोड़ रहे आतंकी

अली नफीस काजमी के अनुसार जियारत के लिए वे इराक के आधा दर्जन शहरों में गए थे। इस दौरान उन्होंने इराक के लोगों से जानकारी मिली कि आतंकी इराकी सेना और वहां के लोगों का बुरी तरह से कत्लेआम कर रहे हैं।

वह दूधमुंहे बच्चों को भी नहीं छोड़ रहे हैं। इराक में इस समय महंगाई काफी बढ़ गई है। पानी के बोतल की कीमत दोगुने से भी ज्यादा हो गई।

वहीं जगह-जगह इराक में शिया युवकों की सेना में भर्ती होने के लिए लाइने लगी हुई है। इराकी सरकार के कब्जे वाले क्षेत्रों में भारतीय मजदूरों और अन्य लागों की हिफाजत के लिए सेना पूरे प्रयास कर रही है।
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अभी भी इराक में फंसे हैं कुछ लोग

काजमी ने बताया कि वह इराक में अपने धार्मिक स्थलों को विद्रोही से बचाने के लिए अपनी जान भी दे सकते हैं। जरूरत पड़ने पर विद्रोहियों के खिलाफ लड़ने के लिए वे दोबारा से इराक जाएंगे।

काजमी ने बताया कि भारत आने से पहले उन्होंने अपने पासपोर्ट और आईडी की फोटो कापी इराक के धार्मिक नेता अयातुल्ला नजमी के पास जमा करवा दी थी।

रसूलपुर धौलड़ी के तीन व्यक्ति अभी भी इराक में फंसे हुए है। धौलड़ी निवासी सरकार हुसैन के अनुसार जियारत के लिए गए मंजूर हुसैन उसकी पत्नी तथीर और जाकिर हुसैन की पत्नी नूरजहां अभी भी इराक में फंसे हुए हैं।

उनकी सलामती के लिए गांव में दुआ मांगी जा रही है। सरकार हुसैन ने बताया कि इराक में फंसे भारतीयों और वहां के नागरिकों की रक्षा के लिए रविवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में गांव के लोग हिस्सा लेंगे।
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