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IS के चंगुल से छूटकर घर लौंटीं भारतीय नर्सें

Sat, 07 Feb 2015 08:13 PM IST
इमरान क़ुरैशी/बीबीसी हिंदी डॉट कॉम
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इराक के किरकुक में काम कर रही 11 भारतीय नर्सें वापस अपने घर वापस लौट गई हैं। इन नर्सों को पिछले साल जुलाई में तिकरित में फंसी दूसरी नर्सों की तरह दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ा।
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किरकुक के सरकारी अस्पताल में काम करने वाली 11 नर्सों को कुर्दिस्तान की राजधानी इबरिल भेज दिया गया था और वहां से भारतीय दूतावास ने उन्हें शनिवार की सुबह केरल के कोच्चि और कोझीकोड भेज दिया।

एक नर्स मरीना एलॉयसियस ने बीबीसी हिंदी से कहा, "वहां काम करने में कोई दिक्कत नहीं थी। हम वापस आए क्योंकि वहां से दो किलोमीटर की दूरी पर बमबारी हो रही थी और हम तिकरित जैसी स्थिति का सामना नहीं करना चाहते थे।"
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इराक़ में आईएस चरमपंथियों और सेना के बीच जारी संघर्ष की चपेट में वह अस्पताल भी आ गया था जहां केरल की 46 नर्सें काम कर रही थीं।
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आईएस ने वेतन देने से किया इनकार

केरल सरकार को भी इस बारे में जानकारी तब मिली जब एक नर्स मरीना जोस ने अधिकारियों को अलर्ट किया। आईएस ने इस अस्पताल पर अपना नियंत्रण कर लिया था और सभी नर्सों को बेसमेंट में डाल दिया था।

उन्हें बाद में मोसुल ले जाया गया था जहां भारत सरकार ने उनकी रिहाई के लिए आईएस के साथ बातचीत की और उनकी भारत वापसी सुनिश्चित की।

यह पहली ऐसी मिसाल थी जब दुनिया को यह अंदाज़ा हुआ कि आईएस के साथ भी बातचीत संभव है। आईएस ने नर्सों के बकाया वेतन का भुगतान करने से इनकार कर दिया क्योंकि उनका अनुबंध इराकी सरकार के साथ था।

एलॉयसियस के मुताबिक किरकुक की नर्सों के वेतन का भुगतान करने के अलावा 'अनुभव प्रमाणपत्र' भी दिया गया है।
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600 से 800 डॉलर का वेतन

27 वर्षीय जूली एमैनुएल का कहना है, "हमें पिछले डेढ़ साल से नियमित तरीक़े से वेतन मिल रहा था। मैंने अपने एक लोन का भुगतान भी कर दिया जिसे मैंने नौकरी पाने के लिए एजेंट को दिया था।"

इन नर्सों को अपने अनुभव के आधार पर 600-800 डॉलर वेतन मिल रहा था। एमैनुएल का कहना है, "जब एक से डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर बमबारी शुरू हो गई तब हमने भारतीय दूतावास को इसकी सूचना दी और उन्होंने सारा इंतजाम कर दिया।"

तिकरित की नर्सों की तरह ही किरकुक की नर्सों को भी अपनी पढ़ाई के लिए लिए गए लोन और खाड़ी और मध्य पूर्व में नौकरी पाने के लिए एजेंटों को भुगतान करना है।
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