शहीदे आजम भगत सिंह का सरकारी रिकार्ड में बतौर शहीद उल्लेख नहीं होने पर सरकार सोमवार को राज्यसभा में बुरी तरह घिर गई। शहीद का दर्जा न दिए जाने पर लगभग सभी दलों के सदस्यों ने उच्च सदन में तीखी नाराजगी जताई।
इस मुद्दे पर चौतरफा घिरी सरकार ने सफाई देते हुए कहा कि वह भगत सिंह को शहीद ही मानती है। अगर सरकारी अभिलेख में उनका नाम बतौर शहीद दर्ज नहीं है तो सरकार रिकार्ड में जरूरी सुधार करेगी।
इसी दौरान चर्चित नेता राजनारायण को भी स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा देने की भी मांग उठी। मगर सरकार ने महज भगत सिंह के बारे में ही सफाई दी।
राज्यसभा में शून्य काल में इस मामले को जदयू के केसी त्यागी ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने इसे बेहद आपत्तिजनक और दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए आजादी के 66 साल बीत जाने के बावजूद महान क्रांतिकारी को शहीद का दर्जा न दिया जाना बेहद शर्मनाक है।
त्यागी की बात पूरी होते ही लगभग सभी दलों ने एकमत से इस मुद्दे पर तीखी नाराजगी जताई। भाजपा के वैंकेया नायडू, बसपा के सतीश चंद्र मिश्र, जदयू के शिवानंद तिवारी और वाम दलों के सदस्यों ने भगत सिंह को शहीद का दर्जा नहीं दिए जाने पर तीखी नाराजगी जताई। इन सदस्यों ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री को तत्काल सफाई देने की मांग की।
सदस्यों की तीखी नाराजगी के बीच सरकार की ओर से सफाई देते हुए संसदीय कार्य राज्यमंत्री राजीव शुक्ला ने कहा कि सरकार के मन में भगत सिंह के प्रति बहुत सम्मान है।
सरकार उन्हें हमेशा से शहीद मानती आई है। अगर गृह मंत्रालय के रिकार्ड में उनका नाम शहीदों में दर्ज नहीं है तो सरकार तत्काल रिकार्ड में सुधार कराएगी।
उन्होंने कहा कि सम्मान का भाव होने के कारण ही नवांशहर का नाम बदल कर शहीद भगत सिंह नगर किया गया। सरकार उन्हें बकायदा शहीद मानती है और अगर सरकारी रिकार्ड में उन्हें शहीद का दर्जा का उल्लेख नहीं है तो इसमें तत्काल बदलाव कराया जाएगा।
त्यागी ने इस दौरान बीती सदी के 70 के दशक में कांग्रेस विरोधी आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाने वाले चर्चित नेता राजनारायण को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिए जाने की मांग की। मगर सरकार ने इस संबंध में कोई आश्वासन नहीं दिया।