सेना ने अब अपने अधिकारियों को चुस्त दुरुस्त रखने के लिए कमर कस ली है।
उसने शीर्ष स्तर के अधिकारियों में मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर जैसी जीवन शैली से जुड़ी बीमारियों के मामले बढ़ने के मद्देनजर उन्हें फिट रखने के नए आदेश जारी किए हैं।
नई सेहत अनुशासन व्यवस्था लागू होने के बाद अब उच्च पदों के सैन्य अधिकारियों को अपने जॉगिंग सूट फिर से निकालने होंगे।
अपने एक अध्ययन में सेना के अधिकारियों की सेहत के चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे। जिसके मुताबिक हर पांच में से चार सैन्य अधिकारी प्री हाइपरटेंशन की स्थित में पहुंच रहे हैं और एक तिहाई से अधिक जीवनशैली संबंधी विकारों से जूझ रहे हैं।
सैन्य बलों को सेहत के मामले में आम लोगों से बेहतर स्थिति में माना जाता है, क्योंकि उनके लिए शारीरिक प्रशिक्षण एवं आहार के बेहतर अनुशासन लागू हैं।
सेहत एकदम फिट रखने के लिए तय किए गए नए नियमों के मुताबिक, शीर्ष अधिकारियों को भी साल में कम से कम तीन बार फिजिकल फिटनेस टेस्ट और इतनी ही बार बैटल फिटनेस टेस्ट (जंगी सेहत परीक्षणों) से गुजरना होगा।
सेहत की जांच के लिए उन्हें लंबी दौड़ के अलावा 100 मीटर की फर्राटा दौड़ और दंड-बैठक जैसी कसरतों के दौर से गुजरना होगा।
सेना में 50 साल के अधिकारियों के लिए साल में कम से कम तीन बार कडे़ शारीरिक और बैटल फिटनेस टेस्ट से गुजरने की व्यवस्था पहले से थी लेकिन अब इसे 55 साल तक लागू कर दिया गया है।
सेना के सूत्रों के अनुसार, 50 साल तक सेहत मानकों के पालन के बाद अचानक ढील देने का बुरा असर अधिकारियों की सेहत पड़ता है।
बैटल फिटनेस टेस्ट में अधिकारियों को पूरी तरह जंगी पोशाक पहनकर पांच किलोमीटर की रेस के अलावा 60 मीटर की फर्राटा दौड़ और 20 किलोमीटर के रूटीन मार्च में हिस्सा लेना होगा।
यह टेस्ट इस बात को ध्यान में रखकर तय किया गया है कि सेना को रेगिस्तान से लेकर पहाड़ तक और बेहद गर्म से लेकर निहायत ठंडे वातावरण में काम करना पड़ता है।