भारतीय वायुसेना चीन को कड़ी टक्कर देने के लिए लद्दाख के न्योमा क्षेत्र में लड़ाकू विमानों का बेस बनाएगी। इसके लिए भारतीय वायुसेना अधिकृत 42 कॉम्बैट स्कवैड्रन क्षमता से कम विमानों के साथ काम कर रही है।
वायुसेना प्रमुख एनएके ब्राउन के मुताबिक 12वीं और 13वीं योजना में वायुसेना को एक खास स्तर के लड़ाकू ताकत को हासिल कर लेना होगा।
वायुसेना की सालाना प्रेस कांफ्रेंस में ब्राउन ने इसकी ताकत बढ़ाने के संदर्भ में चीन का भी जिक्र किया और कहा कि भारत, चीन सीमा से लगे लद्दाख के न्योमा में लगे लद्दाख में लड़ाकू विमानों का बेस बनाएगा।
वायुसेना उत्तर पूर्व में 24 घंटों के ऑपरेशन के लिए सात एयरफील्ड भी विकसित कर रही है। ब्राउन ने जम्मू-कश्मीर के केरन सेक्टर में भारी हथियारों के साथ घुस आए आतंकवादियों को निकालने के लिए वायुसेना की मदद की भी पेशकश की।
वायुसेना की क्षमता मजबूत करने के संदर्भ में ब्राउन ने कहा कि इसकी अधिकृत क्षमता 42 स्कवैड्रन की है। लेकिन यह कम क्षमता के साथ काम कर रही है।
अगर वायुसेना को 2017 तक मल्टी-रोल लड़ाकू विमान नहीं मिल पाते हैं तो इसकी ताकत घट सकती है।
उन्होंने कहा कि वायुसेना लद्दाख में लड़ाकू विमानों के लिए एक नया बेस बनाने का इरादा रखती है। इसके साथ ही इसका इरादा रनवे लंबाई को बढ़ाने और पाकिस्तान के साथ लगी नियंत्रण रेखा के गिर्द कारगिल एयरफील्ड को अपग्रेड भी करने का है।