पाकिस्तानी सेना के स्पेशल सर्विस ग्रुप (एसएसजी) के सैनिकों की भारतीय जवानों के साथ बर्बरता करने की जांच के लिए भारत संयुक्त राष्ट्र (यूएन) जैसे किसी भी तीसरे पक्ष को शामिल करने के पक्ष में नहीं है। सरकार का मानना है कि जम्मू-कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मामला है।
जम्मू-कश्मीर विवाद को दोनों देशों के बीच का मामला बनाए रखने के लिए भारत ने लंबी कोशिशें की है। इस नाजुक वक्त का फायदा उठाकर पाकिस्तान की तीसरे पक्ष को शामिल करने की कोशिशों को भारत कामयाब नहीं होने देगा।
गौरतलब है कि पाकिस्तान की रक्षा मंत्री हिना रब्बानी खार ने एलओसी पर हुई अमानवीय घटना में अपनी सेना की संलिप्तता से इनकार करते हुए कहा है कि भारत को यकीन नहीं है तो वह यूएन जैसी संस्था से इसकी निष्पक्ष जांच करा सकता है।
सरकार और सेना के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक रब्बानी का यह बयान जम्मू-कश्मीर के मसले में तीसरे पक्ष को शामिल करने की पाकिस्तान की चाल है। रक्षा मंत्री एके एंटनी ने भी साफ कर दिया है कि इस घटना में पाक सेना की करतूतों के पुख्ता सबूत हैं और इसके लिए किसी और सबूत की जरूरत नहीं है।
सेना के प्रवक्ता ने कहा है कि बिना किसी उकसावे के एलओसी पार कर भारतीय जवानों को मारने और उनके सिर काटने की हरकत किसी भी पेशेवर और सभ्य सेना का काम नहीं है। यह दोनों देशों के बीच सीजफायर के करार में हुए रूल ऑफ इंगेजमेंट (आरओइ) के सख्त खिलाफ है। सेना ने भी शक जाहिर किया है कि पाक सेना की एसएसजी बिग्रेड की इस हरकत के पीछे खास वजह हो सकती है।