भारत जल्द ही पाकिस्तान से लगते विवादास्पद सरक्रीक सीमा इलाके में तैरते बाड़ (फ्लोटिंग फेंस) लगाएगा। ये बाड़ पानी में डूबे धातु के जाल के सहारे टिके रहेंगे। कच्छ के रण में 96 किमी दलदली इलाका अवैध घुसपैठ तथा हथियारों और ड्रग्स की तस्करी के लिए बदनाम है। इस क्षेत्र पर बीएसएफ के मैरीन कमांडो चौबीस घंटे निगरानी रखे हुए हैं। पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 1200 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है।
प्रोजेक्ट से जुड़े सूत्रों ने कहा कि विभिन्न विकल्पों पर विचार के बाद केंद्रीय गृहमंत्रालय ने केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) और राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (एनबीसीसी) को हर मौसम में टिकाऊ गैबियन बॉक्स बाड़ लगाने का जिम्मा सौंपा है।
एनबीसीसी 75 किमी जलमग्न इलाके में बाड़ लगाएगा जबकि शेष क्षेत्र में सीपीडब्ल्यूडी पहले ही काम शुरू कर चुका है। गैबियन बॉक्स एक तरह का धातुओं का बक्सानुमा ढांचा है जोकि हेक्सागोनल के आकार में तारों का संजाल होगा। इसे भारी भरकम पत्थरों से भरकर पानी के तलहटी पर रखा जाएगा।
यह बाड़ गैबियन बॉक्सों पर लगाई जाएगी जिसमें हर मौसम में इस्तेमाल होने वाले तारों का जाल और खंभे होंगे। दरअसल सरक्रीक जलीय दलदली इलाका है। गैबियन बॉक्स पानी के अंदर इस तरह के प्रोजेक्ट के लिए सबसे बेहतर उपाय है। ये बॉक्स बाढ़ पर नियंत्रण में इस्तेमाल होने वाली सामान्य तकनीक है।
समुद्री खारे पानी के प्रभाव से तटीय चट्टानों के टूटने से बचाव में भी इसका प्रयोग किया जाता है। भारत और पाकिस्तान लगातार इस इलाके में समुद्री सीमा के संदर्भ में वार्ता करते रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि वार्ता के जारी रहने के बावजूद बाड़ का काम किया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि पैंटून बाड़ समेत अन्य योजनाओं पर भी विशेषज्ञ इंजीनियरों के साथ विचार किया गया था लेकिन गृह मंत्रालय ने गैबियन बॉक्स तकनीक को इस प्रोजेक्ट के लिए चुना।