इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने मुंबई हमले के मास्टर माइंड जकी-उर-रहमान लखवी की हिरासत की अधिसूचना रद्द कर उसके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ कर दिया है। भारत ने इस मामले पर पाक उच्चायुक्त अब्दुल बासित को समन किया है। हालांकि लखवी तब तक जेल में ही रहेगा जब तक कि इस आदेश पर न्यायाधीश खुद हस्ताक्षर नहीं कर देते हैं।
विदेश सचिव सुजाता सिंह ने पाक उच्चायुक्त को समन कर इस मामले पर गहरी चिंता जाहिर की है। मंत्रालय का कहना है कि आतंकवाद निरोधक अदालत द्वारा जकी-उर-रहमान लखवी की रिहाई के आदेश दे दिए गए जबकि यह बात जगजाहिर है कि लखवी मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों में शामिल था।
मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड आतंकी लखवी ने अपनी हिरासत को कोर्ट में चुनौती दी थी। इससे पहले पाकिस्तान सरकार ने लखवी को रिहा करने से इनकार कर दिया था।
आरोपियों की सजा सुनवाई में ढील कर रहा है पाकिस्तान
भारत का आरोप है कि 26/11 हमलों की योजना बनाने और उसको अंजाम देने में शामिल सात आरोपियों की सजा सुनवाई में पाकिस्तान ढील दे रहा है। भारत का कहना है कि यह बात दो देशों के रिश्तों को बिगाड़ने का काम कर सकती है।
आतंकवाद निरोधक अदालत के जज ने लखवी को 18 दिंसबर को ही जमानत दे दी थी। लेकिन लखवी को अतिरिक्त तीन महीने निगरानी में रखने का आदेश दिया गया था।
लखवी को जमानत मिलने के भारत पाकिस्तान को भारत का कड़ा रुख झेलना पड़ा था। भारत के एतराज के बाद पाकिस्तानी सरकार ने इसे तकनीकी खामी बताते हुए भरोसा दिलाया था कि लखवी की जमानत के फैसले को कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
अपील के लिए पाक सरकार को करना होगा इंतजार
हालांकि पाक सरकार को अदालत के इस फैसले को चुनौती देने के लिए अभी थोड़ा इंतजार करना होगा। क्योंकि कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देने के लिए कोर्ट के आदेश की कॉपी होना जरूरी है, लेकिन इसके मिलने में अभी एक हफ्ते से ज्यादा समय लग सकता है।
सरकारी वकील चौधरी अजहर ने बताया कि सरकार लखवी की जमानत के खिलाफ उच्च अदालत में अपील दायर करेगी। लेकिन अभी सरकार को थोड़ा इंतजार करना होगा क्योंकि जनवरी के पहले हफ्ते से कोर्ट में करीब दो हफ्ते की बंदी हैं। हालांकि पाकिस्तान सरकार लखवी की जमानत को चुनौती देने में अब तक विफल रही है।
वहीं दूसरी ओर छुट्टी के दिन भी लखवी की हिरासत को रद्द करने के आदेश को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। इसका जवाब देते हुए आतंकवाद निरोधक अदालत के जज कौशर अब्बास जैदी ने बताया कि हिरासत से आजादी दिए जाना एक तात्कालिक प्रकृति का मुद्दा है और इस पर फैसले छु्ट्टी के दिन भी किया जा सकता है।