कारगिल जंग के खलनायक और पाकिस्तान के पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ ने दावा किया है कि कारगिल युद्ध पाक सेना के लिए बड़ी उपलब्धि था। एक्सप्रेस न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, ‘अगर नवाज शरीफ जंग के समय अमेरिका न गए होते तो पाकिस्तानी सेना भारत के 300 वर्ग मील इलाके को अपने कब्जे में ले लेती।’ अब जबकि कारगिल में घुसपैठ के राज खुल चुके हैं तो मुशर्रफ ने कारगिल में पाक सेना के मिशन का बचाव किया है।
मुशर्रफ ने कारगिल जंग के राज से परदा उठाने वाले रिटायर्ड लेफ्टीनेंट जनरल शाहिद अजीज के आरोप का जवाब देते हुए कहा कि यह जरूरी नहीं था की सेना के सभी कमांडरों को इसकी जानकारी दी जाती। हालांकि अपनी आत्मकथा ‘इन द लाइन ऑफ फायर’ मुशर्रफ ने स्वीकार किया है कि कारगिल जंग में पाक सेना शामिल थी।
मुशर्रफ ने पार की थी एलओसी
मुशर्रफ ने न केवल भारत के खिलाफ युद्ध की योजना बनाई थी, बल्कि दोनों देशों के बीच बनी नियंत्रण रेखा (एलओसी) को भी पार किया था। पाकिस्तान के एक रिटायर्ड कर्नल की किताब ‘विटनेस टू ब्लंडर: कारगिल स्टोरी अनफोल्ड्स’ में यह खुलासा किया गया है। सेवानिवृत्त कर्नल अशफाक हुसैन कारगिल युद्ध के दिनों में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के जनसंपर्क विभाग आईएसपीआर में डिप्टी डायरेक्टर थे।
उन्होंने किताब में इस युद्ध को मुशर्रफ की बड़ी भूल करार देते हुए लिखा है : 28 मार्च 1999 को चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल मुशर्रफ अपने कुछ अधिकारियों के साथ ‘जकारिया’ पोस्ट गए थे, जो नियंत्रण रेखा से 11 किलोमीटर आगे है। इस पोस्ट पर तब 12 नार्दर्न लाइट इन्फेंट्री ने कब्जा कर रखा था। उल्लेखनीय है कि मई से जुलाई 1999 तक दोनों देशों के बीच कारगिल युद्ध हुआ था। जिसमें पाकिस्तान को हार का मुंह देखना पड़ा था।