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भारत में नहीं बदली भ्रष्टाचार की स्थिति

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भ्रष्टाचार से परेशान जनता ने भले ही देश में सरकार बदल दी हो लेकिन हालात नहीं बदले हैं। सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार का वही हाल है, जो एक साल पहले था। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के करप्शन परसेप्शन इंडेक्स (सीपीआई) में देश को महज 38 अंक मिले हैं। पिछले वर्ष भी भारत के इतने ही अंक थे। 168 देशों की सूची में भारत का स्थान 76वां है।
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इंडेक्स में जितने अधिक नंबर होते हैं, भ्रष्टाचार उतना ही कम होता है। इस हिसाब से भारत की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। वहीं पिछले साल रैंकिंग में 174 देश शामिल थे और उनमें भारत 85वें नंबर पर था। ऐसे में इस बार देशों की संख्या कम होने से रैंकिंग भी कम हुई है। पड़ोसी देशों की बात करें तो भूटान के हालात सबसे बेहतर हैं। 65 अंकों के साथ यह देश 27वें नंबर पर हैं।

इसके अलावा भारत के सभी पड़ोसी सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार की समस्या से बुरी तरह जूझ रहे हैं। इस रैंकिंग में चीन 83 तो बांग्लादेश 139वें पायदान पर है। पाकिस्तान, श्रीलंका और नेपाल के अंकों में मामूली बढ़ोतरी हुई है।
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वहीं दुनिया में डेनमार्क सबसे कम भ्रष्ट देश है। उसे 91 प्वाइंट्स के साथ लगातार दूसरे साल यह तमगा मिला है। दूसरे नंबर पर स्थित फिनलैंड के 90 और स्वीडन के 89 नंबर हैं। उत्तर कोरिया और सोमालिया सूची में सबसे नीचे हैं। दोनों देशों का स्कोर आठ है।
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मोदी सरकार वादा करने में आगे,निभाने में पीछे

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के एशिया पैसेफि‌क क्षेत्र के डायरेक्टर श्रीरक प्लीपट ने ईमेल के जरिए टीओआई को बताया कि भारत में भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए किए वादों को तोड़ने के मामलों की भरमार है। ऐसे मामले मई 2014 में हुए आम चुनाव से फरवरी 2015 दिल्‍ली विधानसभा के बीच ज्यादा देखे गए हैं।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष जारी सीपीआई इंडेक्स से जनता और नेताओं को कड़ा संदेश मिलेगा।

जनता अब सरकार से भ्रष्टाचार के ऊपर सवाल पूछ सकेगी और चुनावी वादों को निभाने के लिए दबाव बना सकेगी। साथ ही उन्होंने वर्तमान मोदी सरकार पर कहा कि ये सरकार वादा करने में सबसे आगे है और निभाने में सबसे पीछे।
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