भारत और पाकिस्तान के रिश्तों पर पड़ी बर्फ को पिघलाने की नए सिरे से कोशिश शुरू हो गई है। इस क्रम में एनएसए अजीत डोभाल और उनके समकक्ष नासिर खान ने मुलाकात की।
ये मुलाकात पेरिस में जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपने पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ के बीच हुई मुलाकात के बाद बैंकाक में हुई। बातचीत के बाद दोनों ही देशों की ओर से बयान जारी किया गया।
इस बातचीत में जम्मू-कश्मीर भी शामिल था, जिस पर ऊफा में बनी सहमति के आधार पर दोनों देशों के बीच एनएसए स्तर की बातचीत टूट गई थी। बयान में कहा गया है कि इस वार्ता में शांति, सुरक्षा, आतंकवाद, जम्मू-कश्मीर और नियंत्रण रेखा पर शांति बनाने सहित कई दूसरे जरूरी मुद्दों पर चर्चा हुई।
गौरतलब है कि इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की भारत के साथ बिना शर्त बातचीत की घोषणा के तत्काल बाद पीएम मोदी बिना किसी तय एजेंडे के पेरिस में अपने पाकिस्तानी समकक्ष से मिले थे।
कश्मीर बना था एनएसए स्तर की बातचीत का रोड़ा
ऊफा में बनी सहमति के बाद बैठक के एजेंडे पर मतभेद के कारण टली एनएसए स्तर की बातचीत आखिरकार बैंकाक में संपन्न हुई। खासबात यह है कि इस बातचीत में जम्मू-कश्मीर भी शामिल था, जिसे भारत ने पहले एनएसए स्तर की बातचीत के एजेंडे में शामिल करने से इंकार कर दिया था।
सूत्रों के मुताबिक ऊफा में बातचीत की पहल पीएम मोदी की ओर से हुई थी तो पेरिस में नवाज ने बातचीत की दिशा में पहल की। जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के इतर हुई दोनों नेताओं के बीच बातचीत में नवाज ने बैंकाक में एनएसए स्तर की बातचीत का प्रस्ताव रखा। पीएम मोदी की सहमति हासिल होते ही आनन फानन दोनों देशों ने इस बातचीत की पहल की।
एनएसए स्तर की बातचीत के बाद दोनों देशों की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि वार्ता सौहार्दपूर्ण और रचनात्मक माहौल में आयोजित की गई। इसमें आतंकवाद, शांति और सुरक्षा, जम्मू-कश्मीर, नियंत्रण रेखा पर शांति बनाए रखने सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई। बयान में यह भी कहा गया है कि दोनों देशों के बीच इस रचनात्मक क्रियाकलापों को भविष्य में जारी रखने पर सहमति बनी है।
गौरतलब है कि केंद्र में नई सरकार आने के बाद दोनों देश रिश्ते को सुधारने की दिशा में एक कदम आगे दो कदम पीछे की रणनीति अपनाए हुए हैं। पीएम मोदी के शपथ लेने के बाद दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की बातचीत पाकिस्तानी उच्चायुक्त की कश्मीरी अलगाववादी नेताओं से बातचीत के कारण टूट गई थी। जबकि इसके बाद एनएसए स्तर की बातचीत में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा रोड़ा बना था।
पाकिस्तान हर हाल में आतंकवाद के साथ जम्मू-कश्मीर को भी बातचीत के एजेंडे में शामिल कराना चाहता था, जबकि भारत का कहना था कि ऊफा में बनी सहमति में बातचीत के एजेंडे में जम्मू-कश्मीर शामिल नहीं है।