यदि सुप्रीम कोर्ट के राइट टू रिजेक्ट से संबंधित फैसले को लागू किया जाता है तो मतदाताओं को चुनाव में उम्मीदवारों को नकारने का हक देने वाला भारत 14वां देश बन सकता है।
मील का पत्थर माने जा रहे इस फैसले में कोर्ट ने कहा कि मतदाताओं को अपने क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे सभी उम्मीदवारों को नकारने का अधिकार है। लोग ईवीएम मशीन में निगेटिव वोट का बटन दबाकर ऐसा कर सकते हैं।
सर्वोच्च अदालत ने कहा कि इससे राजनीतिक पार्टियों को चुनावों में ईमानदार उम्मीदवार उतारने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
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कोर्ट ने चुनाव आयोग को इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में ‘इनमें से कोई नहीं’ (एनओटीए) का विकल्प मुहैया कराने की व्यवस्था करने को कहा। यह बटन चुनाव में खड़े उम्मीदवारों के नाम के अंत में होगा।
दुनिया के 13 देश पहले ही अपने मतदाताओं को उम्मीदवारों को नकारने का अधिकार दे चुके हैं। इनमें पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश भी शामिल है।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पी सदाशिवम की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि संसद के अंदर वोटिंग मशीन में तीन बटन होते हैं हां, नहीं और तटस्थ का।
इसी तरह से चुनावों में मतदाताओं को तटस्थ की जगह इनमें से कोई नहीं का बटन का विकल्प मुहैया कराना चाहिए ताकि लोग इस बटन को दबाकर अपनी इच्छा जाहिर कर सकें कि जब तक उनके वोट का सही हकदार नहीं मिलता वे मतदान से दूर ही रहेंगे।
इन देशों ने दिया है नकारने का हक
फ्रांस, बेल्जियम, ब्राजील, ग्रीस, उक्रेन, चिली, बांग्लादेश, स्टेट ऑफ नेवादा, फिनलैंड, अमेरिका, कोलंबिया, स्पेन और स्वीडन।