भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय वन सेवा के अफसरों ने केंद्र से राजनीतिक कारणों से अधिकारियों को निलंबित करने के खेल को बंद कराने की मांग की है।
इन्होंने कहा है कि यदि किसी आईएएस अधिकारी ने सेवा शर्तों का उल्लंघन किया है और उसकी गलती माफी के काबिल नहीं है तो उसे तत्काल बर्खास्त किया जाए। उसे अनिश्चित समय तक निलंबित नहीं रखा जा सकता।
अधिकारियों ने ओडिशा के 1989 बैच के आईएएस विनोद कुमार के मामले को उठाते हुए केंद्र से दखल की मांग की है। विनोद कुमार पिछले 19 वर्षों से निलंबन का दंश झेल रहे हैं।
सेंट्रल इंडियन सिविल एंड एडमिस्ट्रेटिव एसोसिएशन (सीआईसीएए) ने केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्यमंत्री वी नारायणसामी से मुलाकात कर मौजूदा सेवा नियमों में संशोधन की मांग की है।
संघ ने कहा है कि अधिकारियों के निलंबन का खेल बंद होना चाहिए। यदि उन्होंने गलती की है तो उन्हें तत्काल नौकरी से बर्खास्त करना चाहिए। एसोसिएशन ने केंद्र से ओडिशा के आईएएस विनोद कुमार के मामले में भी हस्तक्षेप की मांग की है।
विनोद कुमार के ऊपर 1900 रुपये की रिश्वत लेने का आरोप है। इस आरोप को लेकर राज्य सरकार ने उन्हें पिछले 19 वर्षों से निलंबित कर रखा है। ऐसे में वे दूसरी नौकरी भी नहीं कर पा रहे हैं।
संघ के मानद सचिव संजय भूसरेड्डी ने नारायणसामी से प्रदेश सरकारों को संविधान के दिए गए इस अधिकार के दुरुपयोग को रोकने के लिए आल इंडिया सर्विस-डिसिपलिन एंड अपील-रूल्स 1989 में संशोधन करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि इस संशोधन के बाद अधिकारियों को पर्याप्त सुरक्षा मिल सकेगी और वे अपना दायित्व स्वतंत्रता पूर्वक बिना किसी खौफ के पूरा कर सकेंगे।
उन्होंने इन सेवाओं के अधिकारियों में उत्तर प्रदेश की आईएएस अधिकारी दुर्गा नागपाल और हरियाणा काडर के आईएएस अधिकारी अशोक खेमका के प्रति संबंधित राज्यों की सरकारों के व्यवहार को लेकर चिंता व्यक्त की गई है।