भारत के अत्याधुनिक संचार उपग्रह जीसैट-10 को शनिवार को फ्रेंच गुयाना से यूरोपीय उपग्रह प्रक्षेपण रॉकेट एरियन-5 के जरिए अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर दिया गया। एरियन पांच ने तड़के दो बजकर 48 मिनट पर उड़ान भरी और 30 मिनट बाद इसने भारत द्वारा निर्मित अब तक के सबसे भारी 3.4 टन वजनी इस उपग्रह को अपेक्षित कक्षा में पहुंचा दिया।
इसरो के मुताबिक उपग्रह की उप प्रणालियों मुख्य रूप से उर्जा, तापमान, कमान, सेंसर, नियंत्रण आदि की प्रारंभिक जांच की गई तथा सभी मापदंड संतोषजनक पाए गए। इसके बाद प्रणोदन प्रणाली की मदद से उपग्रह को पृथ्वी और सूर्य की ओर उन्मुख किया गया। उपग्रह अच्छी हालत में है। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि इसरो के 101वें अंतरिक्ष मिशन जीसैट-10 का प्रक्षेपण सफल रहा।
इसरो के मुताबिक उपग्रह सही काम कर रहा है और यह नवंबर से व्यावसायिक उपयोग के लिए उपलब्ध होगा। इस उपग्रह पर कुल 30 ट्रांसपोंडर लगे हैं जिससे देश की संचार और प्रसारण क्षमता में इजाफा होगा। इनमें दस-दस ट्रांसपोंडर केयू बैंड के और छह ट्रांसपोंडर विस्तारित सी बैंड के हैं।
उपग्रह पर दिशासूचक प्रणाली (गगन) भी स्थापित है जिसका इस्तेमाल भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण विमानों को दिशा बताने में करेगा। इस उपग्रह का संभावित कार्यकाल 15 वर्ष होगा।
इसरो ने बताया कि जीसैट-10 परियोजना पर 750 करोड़ का खर्चा आया है जिसमें उपग्रह की लागत, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी एरियनस्पेस की प्रक्षेपण सेवा और बीमा का खर्च शामिल है।