दो भारतीय मछुआरों की केरल तट पर गोली मारकर हत्या करने के आरोप में इटली के दो मरीन गार्डों पर भारत की अदालत में फौजदारी का मुकदमा चलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि विदेशी अभियुक्तों पर केरल राज्य के बजाए भारत सरकार के अधिकार क्षेत्र में मुकदमा चलेगा। इसके लिए विशेष अदालत का गठन किया जाएगा। केंद्र सरकार सर्वोच्च अदालत के चीफ जस्टिस से मशविरे के बाद विशेष अदालत का स्थान तय करेगी।
चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मेरीटाइम जोन एक्ट, 1976 तथा संयुक्त राष्ट्र की संधियों के तहत मुकदमा भारत सरकार के क्षेत्राधिकार में चलेगा। केरल सरकार अभियुक्तों पर मुकदमा नहीं चला सकती। विशेष अदालत हत्या तथा आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत दोनों अभियुक्तों पर मुकदमा चलाएगी।
अभियुक्त सुप्रीम कोर्ट की कस्टडी में
केरल के कोलाम जिला अदालत में चल रहे मुकदमे को विराम देने का आदेश दिया गया है। जमानत पर चले रहे दोनों अभियुक्त कोच्चि के बजाए दिल्ली में रहेंगे। वे इटली दूतावास के नियंत्रण में रहेंगे। अभियुक्तों को सप्ताह में एक दिन नई दिल्ली के चाणक्यपुरी थाने में हाजिरी देने के लिए कहा गया है।
कोलाम के ट्रायल कोर्ट में जमा उनका पासपोर्ट भी केंद्रीय गृह मंत्रालय के कब्जे में रहेगा। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि विशेष अदालत के गठन तक अभियुक्त सुप्रीम कोर्ट की कस्टडी में रहेंगे।
इटली सरकार ने दायर की थी याचिका
इटली सरकार तथा दोनों अभियुक्तों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चार सितंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। पिछले साल 15 फरवरी को हुई वारदात का मुकदमा भारतीय अदालत में चलाने के विरोध में इटली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इटली सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि भारतीय अदालतों को इतालवी नौसैनिकों के खिलाफ मुकदमा चलाने का अधिकार नहीं है।
केरल की अदालत में चीफ सार्जेंट मासीमिलीआनो लाटोरी और सार्जेंट सैलवटोरी जीरोन के खिलाफ मुकदमा चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर होने के बाद ट्रायल पर रोक लगा दी गई थी। अभियुक्त गार्डों का कहना है कि समुद्री लुटेरों की आशंका के चलते उनकी ओर से गोली चलाई गई।