गैंगरेप के खिलाफ आवाज उठाने पर छात्र-छात्राओं पर लाठीचार्ज व पानी की बौछार करने और धारा-144 लगाकर आंदोलन को कुचलने की गूंज हाईकोर्ट में पहुंच गई है। बुधवार को मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने पुलिस के रवैये पर नाराजगी जताते हुए दायर याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।
मुख्य न्यायाधीश डी. मुरूगेसन व न्यायमूर्ति वीके जैन की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि आंदोलन व भाषण की अभिव्यक्ति के अधिकार को दबाने के लिए धारा-144 का ऐसे प्रयोग नहीं किया जा सकता। यदि ऐसा हुआ तो सच्चाई का नुकसान होगा।
अधिवक्ता आनंद कुमार मिश्रा ने जनहित याचिका में आरोप लगाया कि पुलिस इस धारा का प्रयोग गैरकानूनी व मनमाने तरीके से कर रही है। धारा मात्र उस स्थिति में लगाई जा सकती है जब प्रदर्शन या कोई अन्य ऐसा कारण हो जिससे आम लोगों के जीवन आदि पर खतरा हो।
राजधानी में 16 दिसंबर को चलती बस में गैंगरेप हुआ। आम लोगों का विश्वास पुलिस से उठ गया। स्कूली व कॉलेज के छात्र इंडिया गेट पर कानून में संशोधन की मांग को लेकर प्रदर्शन पर उतर आए। यह कोई राजनीतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि सामाजिक शांतिपूर्ण आंदोलन था। किसी भी छात्र ने हथियार का प्रयोग नहीं किया।
फिर भी पुलिस ने धारा-144 का प्रयोग एक हथियार के रूप में करके आम लोगों के मौलिक व संवैधानिक अधिकारों का हनन किया। पुलिस ने फोर्स का गैरकानूनी तरीके से इस्तेमाल करके छात्र-छात्राओं पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और पानी की बौछार छोड़ी। उन्होंने 4 जून को रामलीला मैदान में रामदेव की रैली में ऐसे ही किए गए लाठीचार्ज का हवाला देते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने पुलिस की कार्रवाई को गलत ठहराया है।
याची ने कि वे 24 दिसंबर को पटियाला हाउस जा रहे थे ताकि गिरफ्तार लोगों की जमानत व जमानती पेश कर सकें लेकिन पुलिस ने उन्हें वहां जाने से रोका। यह सरासर धारा-144 लगाने के नियम का उल्लंघन है। इसके अलावा पुलिस के पास इस धारा को लगाने का कोई ठोस आधार नहीं है।
पुलिस ने 22 दिसंबर को घोषणा की और 23 दिसंबर को इसे लागू किया यानी ऐसी कोई भी आपात स्थिति नहीं कि धारा तुरंत लागू की जाती। अत: धारा लगाने संबंधी अधिसूचना को रद्द करके इसे गैरकानूनी ठहराया जाए। वहीं, पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त सालीसीटर जनरल सिद्धार्थ लूथरा ने धारा-144 संबंधी फैसले को उचित ठहराया।
उन्होंने कहा कि इंडिया गेट पर स्थिति काफी खराब हो गई थी और आम लोगों का वहां पहुंचना मुश्किल हो गया था। इंडिया गेट पर आम लोगों आते हैं और प्रदर्शन के कारण वे वहां नहीं आ पा रहे थे। खंडपीठ ने पुलिस के तर्कों पर असहमति जताते हुए कई सवाल किए और फैसला सुरक्षित रख लिया।