सरकारी आँकड़ों के मुताबिक पिछले 26 सालों में पंजाब ने देश में सबसे ज्यादा 34 आतंकी हमले झेले हैं। इससे इस धारणा को बल मिलता है कि भारतीय सुरक्षा बल आतंकी हमलों से निपटने से पूरी तरह काबिल नहीं है।
गृह मंत्रालय के आकड़ों के मुताबिक जम्मू कश्मीर और दिल्ली में इतने ही समय में 27 और 18 आतंकी हमले हुए हैं। हाल ही में पंजाब के पठानकोट में एयरबेस पर हुए हमले में सात सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन ई कुमार भी शामिल हैं।
पिछले 26 साल में पूरे भारत में 136 आतंकी हमले हुए हैं। इसमें पठानकोट का हमला भी शामिल है।
आतंकी हमले दर्शाता है पुलिस की स्थिति
135 हमलों में से 121 हमले आम नागरिकों पर हुए हैं और 14 हमले वीआईपी पर। सबसे ज्यादा आतंकी हमले 2004 में हुए हैं। 2004 में हुए 17 हमलों में 170 लोग मारे गए थे और 350 लोगों से ज्यादा घायल हो गए थे।
पठानकोट एयरबेस पर हमला और गुरुदासपुर में 27 जुलाई 2015 को हुआ हमला भारतीय पुलिस बल की स्थिति दर्शाता है। इंडियास्पेंड ने पहले भी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि यहाँ स्टाफ की कमी है। एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया था कि कैसे पंजाब पुलिस की स्पेशल वेपन्स एंड टैक्टिक्स ( स्वाट) टीम केवल कॉटन टी शर्ट पहनकर लड़ने गए थे।
गुरुदासपुर में पंजाब पुलिस को भारतीय फौज के यूनिफॉर्म में आए तीन बंदूकधारियों को मारने में 12 घंटे का वक्त लगा था। इसकी काफी आलोचना हुई थी।
'पुलिस बल केवल दंगा रोधी साजो सामान से युक्त'
भारत के सबसे बड़े बॉडी ऑरमर बनाने वाली कंपनी एमकेयू के चेयरमैन मनोज गुप्ता के हवाले से एनडीटीवी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, "ज्यादातर राज्यों में पुलिस बल के पास दंगा-रोधी सुरक्षा के लिए साजो-समान मौजूद होते हैं, ना कि किसी चरमपंथी हमले का मुकाबला करने के।"
पुलिस सुधार की योजना में शामिल रहे पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह कहते हैं, "भारत में चरमपंथ से लड़ने की कई स्पष्ट नीति नहीं है।" गृह मंत्रालय के आकड़ों के मुताबिक इन हमलों में 2000 से ज्यादा लोगों की जान गई और 6000 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।
वो कहते हैं, "चरमपंथी घटना के ऊपर पहली पहल स्थानीय पुलिस करती है लेकिन देशभर में पुलिस बल की हालत खस्ता है। जब तक सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक पुलिस सुधार नहीं होता तब तक पुलिस बल अपंग बना रहेगा।"
एसएसजी की ट्रेनिंग पर भी सरकार को ध्यान देने की जरूरत
एनएसजी को पठानकोट में हुआ नुकसान भी यही कहानी बयां करता है। 1984 में आतंकवाद से निपटने के लिए बने बल एनएसजी का 2008 के मुंबई हमले तक हरियाणा के मानेसर में एक ही बेस कैंप था।
24 साल और 100 से ज्यादा हमलों के बाद सरकार ने एनएसजी की और इकाइयां खोली। 2009 में मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और हैदराबाद में चार एनएसजी केंद्र बनाए गए। आखिरी कैंप 2014 में गुजरात में स्थापित किया गया। एनएसजी के प्रशिक्षण और उपकरणों को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं। मसलन 2013 में मेल टुडे की पड़ताल के मुताबिक 2012 में ब्लैक कैट्स को कोई भी हैलिकॉप्टर ट्रेनिंग नहीं दी गई क्योंकि कोई भी हैलिकॉप्टर उपलब्ध ही नहीं था।
तब के एनएसजी के चीफ ने गृह राज्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर कहा था, "पिछले छह महीने में हैलिकॉप्टर नहीं होने की वजह से हेलिकॉप्टर की कोई भी ट्रेनिंग नहीं हुई है। " आतंकवाद से निपटने के लिए राज्य सरकारों की ओर से विशेष बल एंटी-टेरर स्कवायड (एटीएस) तैनात किए जाते हैं। कुछ राज्यों में विशेष इकाइयां भी हैं लेकिन वो या तो निष्क्रिय है या उनके पास उपकरणों की कमी है। सिर्फ महाराष्ट्र में एंटी-टेरर यूनिट-फोर्स वन है।