भारत कितने ही मामलों में पाकिस्तान से आगे क्यों न हो लेकिन सुरक्षा के मसले पर वह पाकिस्तान के लगभग बराबर ही खड़ा है।
ग्लोबल पीस इंडेक्स (जीआईपी) 2013 ने मंगलवार को जारी अपनी एक रिपोर्ट में भारत को 25 हिंसाग्रस्त देशों की सूची में रखा है और रहने के लिए असुरक्षित माना है। भारत को कुल 162 देशों में 141वीं रैंक मिली है।
रिपोर्ट के अनुसार भारत में हिंसा में हर रोज लगभग दो से ज्यादा लोग मरते हैं और साल 2012 में आपसी झगड़े में 799 लोगों की जान गई है।
इस मामले में भारत पहले से ही असुरक्षित और हिंसा से ग्रस्त माने जाने वाले पाकिस्तान, इराक, दक्षिण सूडान और अफगानिस्तान के समकक्ष खड़ा है।
पाकिस्तान को 157 और फगानिस्तान को162वीं रैंक मिली है।
भूटान और नेपाल आगे
शांतिपूर्ण देशों के मामले में भारत भूटान और नेपाल जैसे देशों से बहुत पीछे है। भूटान 20वें, नेपाल 82वें और बंगलादेश105वीं रैंक के साथ भारत से बहुत ऊपर हैं।
इस रैंकिंग में आईसलैंड, साल 2012 में सबसे शांतिपूर्ण देश के तौर पर उभरकर आया है और मध्य अफ्रीकी गणराज्य सबसे निचले पायदान पर है।
क्या हैं वजहें
इस रिपोर्ट के लेखक स्टीव किलेलिया का कहना है कि भारत में सुरक्षा के इस गिरते स्तर की वजह आंतरिक और बाहरी संघर्ष है, छोटे व बड़े हथियारों तक आसान पहुंच और जम्मू कश्मीर में हिंसा है।
उनका कहना है कि अधिक जनसंख्या वाले देश ज्यादा अशांत होते हैं और वहां संघर्ष खत्म करना और ज्यादा कठिन होता है।
पहले के मुकाबले सुधार
वर्ष 2011 के मुकाबले भारत की रैंकिंग में सुधार हुआ है और यह तीन स्थान ऊपर पहुंचा है।
रिपोर्ट के मुताबिक यहां आंतरिक कलह से मरने वालों की संख्या घटी है। साथ ही नागरिकों की आपराधिक गतिविधियों में भी परिवर्तन आया है।
वर्ष 1994 के बाद सांप्रदायिक दंगों, आतंकवाद, विद्रोह और नक्सलवाद से मरने वालों की संख्या चार अंकों से नीचे आई है।
विश्व में भी बड़ी हिंसा
रिपोर्ट के मुताबिक पूरा विश्व भी हिंसा की ओर बढ़ रहा है। पिछले छह सालों में शांतिपूर्ण जीवनयापन को लेकर विश्व में पांच प्रतिशत की कमी आई है। शांतिपूर्ण देशों के मुकाबले हिंसा की ओर बढ़ने वाले देशों की संख्या बढ़ी है।