जर्मनी में नए साल के जश्न के दौरान महिलाओं ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उन पर कई पुरुषों ने यौन हमले किए। इस दौरान महिलाओं के साथ गैंगरेप के भी मामले सामने आए। ये मामले केवल जर्मनी तक ही सीमित नहीं रहे बल्कि हैम्बर्ग में भी ऐसे मामले सामने आए।
जर्मनी के कोलोन, हैम्बर्ग के साथ-साथ कई और शहरों से भी ऐसे मामले सामने आए। जिसके बाद अब आशंका जताई जा रही है कि यूरोप के दूसरे देशों में भी इसके बढ़ने के आसार हैं।
जर्मनी में महिलाओं के साथ हुई इस घटना के पीछे पुलिस ने उत्तरी अफ्रीका से आए शरणार्थियों और अवैध तरीके से आए आप्रवासी के शामिल होने की आशंका जताई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या ऐसी वारदातों के पीछे अरब और अफ्रीकी लोग शामिल हैं।
ये पहली बार हुआ है जब ऐसे मामले यूरोप में सामने आए हैं। इसके लगातार एक शहर से दूसरे शहरों में बढ़े भी हैं। जर्मन पुलिस के मुताबिक ज्यूरिक, साल्जबर्ग में भी ऐसे ही मामले सामने आए हैं।
यूरोप में 'तहर्रुश' की दस्तक
नॉर्थ राइन वेस्फालिया स्टेट के आंतरिक मंत्रालय की रिपोर्ट में जो तथ्य उभरे हैं उनमें 516 में 236 मामले यौन प्रकृति के हैं। इन घटनाओं 'तहर्रुश' शब्द के नाम से जाना जाता है।
ये एक अरबी शब्द है। जिसमें किसी महिला को भीड़ में घेरकर गैंगरेप और यौन शोषण किया जाता है।
अरबी शब्द 'तहर्रुश' का मतलब है किसी महिला को चारों ओर से घेरकर उसका यौन शोषण। इसमें दर्जनभर पुरुष पहले महिलाओं को चारों ओर से घेर लेते हैं फिर उनके साथ छेड़छाड़ की जाती है।
आखिर में उनके साथ बलात्कार किया जाता है। ये सब कुछ भीड़ में किया जाता है। इस दौरान महिलाएं किसी को अपने सहयोग के लिए भी नहीं बुला पाती हैं।
तहर्रुश शब्द का पहली बार इस्तेमाल 2011 में एजिप्ट में हुआ था। उस समय इस शब्द फ्लर्टिंग के तौर पर इस्तेमाल किया गया। लेकिन धीरे-धीरे इसमें महिलाओं पर यौन हिंसाएं बढ़ने लगी।
2011 में एजिप्ट में पहली बार आया मामला
इस अरबी शब्द को पश्चिमी दुनिया में पहली चर्चा तब मिली जब साउथ अफ्रीका की एक टीवी संवाददाता ने इसको उछाला। लारा लोगान 2011 में एजिप्ट में तहरीर स्क्वेयर किसी कार्यक्रम को कवर कर रही थी। इसी दौरान उन पर पुरुषों एक बड़े समूह ने हमला कर दिया।
इस घटना के जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पुरुषों ने अपने हाथों से उनका शारीरिक शोषण किया। कई महीनों के बाद उनके साथ हुई घटना पर कार्यक्रम बनाया गया। इस कार्यक्रम में उन्होंने कई बार लोगों को रोकने के लिए स्टॉप शब्द का इस्तेमाल किया।
एरीजोन स्टेट विश्वविद्यालय के डॉक्टरल कैंडिडेट एन्जी एब्डेलमोनेम ने हाल ही प्रकाशित स्टडी में कहा कि तहर्रूश शब्द एजिप्ट की क्रांति से जुड़ा हुआ है।
जर्मनी के कोलोन और हैम्बर्ग शहर में हुई ऐसी घटनाएं
जर्मनी के कोलोन और हैम्बर्ग शहर में नए साल पर कुछ ऐसा ही हुआ। जब लोग नए साल का जश्न मना रहे थे इस दौरान सैकड़ों महिलाओं ने शिकायत दर्ज कराई कि उनका यौन शोषण किया गया।
इस दौरान शिकार बनी महिलाएं सदमे में रहती हैं। उन पर खौफ इसकदर होता है कि किसी से सहयोग भी नहीं मांग पाती हैं।
फिलहाल जर्मनी में नए साल की मौज-मस्ती के दौरान सामने आए इन आपराधिक मामलों के कारण जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल की उदारवादी आप्रवासी नीति की आलोचना हुई।
जर्मन चांसलर पर उठी उंगलियां
जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने उदारवादी नीति के कारण साल 2015 में यहां अनुमान से ज्यादा शरणार्थी जर्मनी में आ गए। इनमें करीब 11 लाख लोग शरणार्थी के रूप में देश में आए।
हालांकि जब नए साल पर महिलाओं का उत्पीड़न हुआ और उस पर हंगामा बढ़ा तो आखिरकार जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल को अपने फैसले पर सोचने के लिए मजबूर होना पड़ा।
अपराध करने वाले प्रवासियों को वापस भेजने के लिए उन्होंने नियम आसान करने का प्रस्ताव रखा है। जर्मन चांसलर ने कोलोन में नए साल के दौरान महिलाओं पर हुए यौन हमलों के बाद ये कदम उठाया।
शिकायत करने वाली महिलाओं ने कहा था कि संदिग्ध हमलावर उत्तरी अफ्रीकी और अरब मूल के थे। वहीं इस पूरे मामले में सामने आते ही एक बार फिर बहस शुरू हो गई कि क्या यूरोप में महिलाओं के प्रति बढ़ती यौन हिंसा के पीछे अरब-अफ्रीकी लोग हैं?