सुप्रीम कोर्ट ने पान मसाला व गुटखा निर्माताओं से मंगलवार को उन देशों के नाम तलब किए हैं, जहां इन उत्पादों की प्लास्टिक पाउच में बिक्री प्रतिबंधित नहीं है।
मंगलवार को अदालत ने यह निर्देश तब दिया, जब निर्माताओं की ओर से तर्क दिया गया कि विदेशों में इन उत्पादों के प्लास्टिक पाउच में बेचे जाने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। शीर्षस्थ अदालत ने विदेश में प्लास्टिक पाउच में इन उत्पादों को निर्यात करने पर रोक लगा रखी है।
जस्टिस जीएस सिंघवी की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष निर्माताओं की ओर से पेश हुए अधिवक्ताओं ने कहा कि कई देशों में प्लास्टिक पाउच में इन उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध नहीं है। अधिवक्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि यदि इन उत्पादों की प्लास्टिक पाउच में बिक्री हानिकारक है तो अन्य तमाम उत्पाद भी हैं, जिन पर रोक लगाई जानी चाहिए।
याद रहे कि केंद्रीय कानून प्लास्टिक प्रबंधन व निस्तारण नियम-2009 के तहत सरकार ने गुटखा व अन्य तंबाकू उत्पादों की प्लास्टिक पाउच में पैकिंग पर 1 मार्च, 2010 को प्रतिबंध लगाया था। सरकार ने इस कानून को सर्वोच्च अदालत के निर्देश के दो दिनों के भीतर अधिसूचित किया था।
पीठ ने निर्माताओं की दलील पर पूछा कि कौन से देश हैं, जहां पान मसाला, गुटखा व अन्य को प्लास्टिक पाउच में बेचने पर प्रतिबंध नहीं है। इस संबंध में अदालत ने निर्माताओं जवाब देने का निर्देश दिया है।
सर्वोच्च अदालत में जहां चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर की पीठ के समक्ष गुटखा प्रतिबंध का मसला लंबित है, वहीं जस्टिस सिंघवी की पीठ प्लास्टिक पैकिंग पर लगाए गए प्रतिबंध पर सुनवाईकर रही है। गौरतलब है कि पूरे विश्व में से 86 प्रतिशत मुंह के कैंसर के मामले भारत में होते हैं और यह कैंसर चबाने वाले तंबाकू के उत्पादों से देश में 90 प्रतिशत होता है।