पारिवारिक विवाद के चलते कोई भी महिला अपने ससुराल वालों पर घरेलू हिंसा
कानून के तहत मामला दर्ज नहीं करा सकती, अगर वह ससुराल से अलग रहती है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय मूल की एक अमेरिकी नागरिक महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि महिला अपने ससुराल वालों से इतनी दूर रहती है और इस मामले में अगर किसी तरह की हिंसा व प्रताड़ना का मामला बनता भी है तो वह महिला भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करा सकती है, लेकिन उसे घरेलू हिंसा कानून के तहत कोई राहत नहीं दी जा सकती है।
जस्टिस सिंघवी ने फैसले में कहा कि घरेलू हिंसा कानून वहां बनता है, जहां पर याचिकाकर्ता अपने ससुरालवालों के साथ चीजों को बांट कर रह रही हो। इसी दौरान ही शारीरिक, मानसिक और अन्य प्रकार की प्रताड़ना पैदा होती है जिन्हें घरेलू हिंसा कानून के तहत शामिल किया जा सकता है।
इस मामले में यह सब कुछ तब हुआ जब याचिकाकर्ता अपने परिवारवालों से दूर रहती थी। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी को फोन करके या मैसेज करके धमकाया जाता है तो यह मामला आईपीसी के तहत दर्ज हो सकता है लेकिन इसे घरेलू हिंसा कानून का उल्लंघन नहीं कहा जा सकता।