हरियाणा के बीबी पुर गांव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूरे देश के लिए आह्वान किया कि बेटी बचाओ,सेल्फी बनाओ। लेकिन प्रधानमंत्री के गृहराज्य गुजरात में एक ऐसा भी परिवार है जो प्रधानमंत्री के इस आह्वान से कोई खास इत्तफाक नहीं रखता।
14 बच्चियों के पिता बनने के बाद भी उसे एक लड़के के जन्म लेने का इंतजार था। फिलहाल वो एक लड़के का पिता भी है लेकिन अभी उसकी पत्नी फिर से एक और लड़के की चाह में गर्भवती है।
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मामला गुजरात के दाहोद जिले के झारीबउझी गांव का है जहां के निवासी 35 वर्षीय राम सिंह संगोड़ जो अभी भी यह कहते हैं कि अगर इस बार लड़का नहीं हुआ तो हम आगे देखेंगे की और फिर से प्रयास करेंगे।
मुझे मेरे पति ने दी धमकी
वहीं राम सिंह की 33 वर्षीय पत्नी कानू का कहना है कि 7 बार गर्भवती होने
के बाद भी जब मुझे लड़का नहीं हुआ तो मेरे पति ने मुझे धमकी दी कि वो घर
में दूसरी औरत ले आएंगे।
मैं खुद एक अनाथ हूं और यह नहीं चाहती कि मेरा
जीवन फिर से सूना हो जाए इसलिए मैं भी राजी हो गई। कानू ने कहा कि जब 2013
में भगवान ने मेरी गोद में लड़का दिया तो मैं खुशी से बहुत रोई थी और उसका
नाम मैंने विजय रखा था क्योंकि हमें हमारी भक्ति का फल मिला था।
अगर इस जिले के लिंगानुपात की बात करें तो 2011 में यह 948 लड़कियों पर 1000 है, वहीं 2001 में यह आंकड़ा 967 लड़कियों पर 1000 था।
हां मैं मरियल हो गई हूं!
यहां की गरभड़ा तालुका के अंतर्गत आने वाले 100 घरों वाले झारीबउझी में अधिकतर परिवारों में 9 बच्चे तक हैं लेकिन राम सिंह और कानू की एक अलग और विचत्र कहानी है जो लड़कों की चाहत में अब भी प्रयासरत हैं।
राम सिंह के अनुसार हमारे रिवाज में बहनों की जिंदगी में भाई का बड़ा स्थान होता है। बहनों की शादी में भाई उन्हें मंहगे तोहफे देते हैं और 12 लड़कियों के बाद एक लड़का कैसे सब कुछ संभाल सकेगा इसलिए हम एक और लड़के की चाहत में हैं।
वहीं कानू का कहना है कि हां मैं थकी हुई और मरियल सी लगती हूं लेकिन उनका भी कहना सही है कि एक लड़का कैसे सब कुछ संभाल सकेगा। दो लड़के होंगे तो एक दूसरे की मदद कर सकेंगे और बहनों की जिंदगी बेहतर कर सकेंगे।
ये है इनका परिवार
राम सिंह और कानू की शादी 18 वर्ष की उम्र में हुई थी। इनके परिवार में सबसे बड़ी बेटी सेवांता है जिसकी उम्र 17 साल है और फिर निरू जिसकी शादी बीते मार्च में हुई है वो अभी 15 साल की है। उसके बाद सारंग(14), हंसा(13), जोशना(12), रंजन(10), मीना(9) पायल (8), मोनी(7), हसीना (5)किंजल (4), बैगन (3) और विजय (18 माह) का है।
इन बच्चों में पायल, मोनी, हसीना और बैगन स्कूल जाती हैं लेकिन हंसा, जोशना, मीना और रंजन घर परिवार के काम देखती हैं। कानू की दो और लड़कियां काली और ओवंती भी थी।
लेकिन 2 साल की उम्र में ही उनकी मौत हो गई। राम सिंह ने कहा कि वो बीमार थीं और उनकी मौत हो गई लेकिन असल में क्या हुआ ये हमें नहीं पता।
जैसे जैसे परिवार में लोगों की संख्या बढ़ती गई, वैसे- वैसे परिवार के बड़ी
लड़कियों पर घर परिवार का पेट पालने के लिए काम करने का दबाव डाला जाने
लगा।
राम सिंह का कहना है कि जब भी फसल खराब हो जाती है तो वो मध्य प्रदेश और गुजरात के अन्य इलाकों में काम करने के लिए चले जाते हैं। मेरे साथ मेरी बेटियां भी होती है।
मेरा बेटा जब बड़ा हो जाएगा तो वो सारा भार अपने कंधो पर ले लेगा। कानू ने कहा कि मेरे गर्भ के दौरान भी कई दिन मैं बिना खाने के रही हूं। बहुत से दिनों में मुझे खाना नहीं मिलता