देशभर के इंजीनियरिंग कॉलेजों में श्रेष्ठ माने जाने वाले आईआईटी संस्थानों में शिक्षा के लिए छात्रों को अब अपनी जेब और अधिक ढीली करनी होगी। आईआईटी ने सोमवार को अंडरग्रेजुएट छात्रों की ट्यूशन फीस 50 हजार से बढ़ाकर 90 हजार रुपये प्रति वर्ष करने को मंजूरी दे दी। हालांकि एससी और एसटी तथा स्कॉलरशिप पर पढ़ने वाले पिछड़े वर्ग के गरीब छात्रों के शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह निर्णय इसी साल से सभी आईआईटी संस्थानों में लागू होगा।
मानव संसाधन विकास मंत्री एमएम पल्लम राजू ने बताया कि आईआईटी संस्थानों के डायरेक्टरों और उच्चाधिकार प्राप्त टास्क फोर्स ने फीस में संशोधन की सिफारिश की थी। ट्यूशन फीस में वृद्धि का निर्णय इस साल अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम में प्रवेश लेने वाले छात्रों पर लागू होगा। उन्होंने कहा कि शुल्क में समय-समय पर संशोधन किया जा सकता है।
आईआईटी काउंसिल की 46वीं बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री ने बताया कि मौजूदा समय में अंडरग्रेजुएट छात्र हर साल 50 हजार रुपये सालाना ट्यूशन शुल्क दे रहे हैं। उच्चाधिकार प्राप्त टास्क फोर्स ने काकोदकर कमेटी की सुझावों को लागू करने पर विचार किया था। कमेटी ने पिछले साल ट्यूशन फीस को 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 2 से 2.5 लाख रुपये वार्षिक करने की सिफारिश की थी। आईआईटी के डायरेक्टरों और टास्क फोर्स ने इसे 90 हजार रुपये सालाना करने का फैसला किया। सत्र 2008-09 के दौरान ट्यूशन फीस को 25 हजार से 50 हजार रुपये किया गया था।
पल्लम राजू ने पत्रकारों को बताया कि एससी और एसटी वर्ग के छात्रों के ट्यूशन शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस वर्ग के छात्रों को मेस, होस्टल और बुक बैंक जैसी सुविधाएं निशुल्क दी जाती हैं। 25 फीसदी छात्रों जिनके अभिभावकों की आय 4.50 लाख रुपये सालाना से कम है, को सौ फीसद स्कॉलरशिप दी जा रही है। आईआईटी काउंसिल के सदस्यों ने छात्रों को आसानी से लोन सुविधा मुहैया कराने पर भी जोर दिया।
अन्य फैसले
आईआईटी में रिसर्च करने वालों की संख्या साल 2020 तक 3000 से बढ़ाकर 10,000 करने का फैसला लिया गया। इसके साथ ही इन 16 संस्थानों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए मेधावी छात्रों को स्नातक की पढ़ाई पूरी करने लेने के बाद पढ़ाई के काम में लगाने की योजना को भी हरी झंडी दे दी गई है। पीएचडी का रास्ता आसान करने के लिए इसके पंजीकरण के नियमों में भी ढील दी जाएगी।