रेलमंत्री पवन कुमार बंसल के रेल बजट को संतुलित और बेहतर बताने वाली यूपीए सरकार के लिए सहयोगी दलों की नाराजगी गले की हड्डी बनती जा रही है। रेल बजट को लेकर एनसीपी पहले से ही नाराज हैं। अब अन्य दलों के सांसदों ने भी केंद्र पर राज्य की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है।
शुक्रवार को एनसीपी प्रमुख शरद पवार के नेतृत्व में सभी दलों के सांसदों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात कर अपनी नाराजगी दर्ज कराई। हालांकि प्रधानमंत्री ने सांसदों को कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया है लेकिन लंबित योजनाओं को बजट में शामिल किए जाने पर विचार करने की बात जरूर कही।
पवार ने रेल बजट को जनविरोधी बताते हुए जानबूझकर महाराष्ट्र की उपेक्षा किए जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के बाद महाराष्ट्र देश का दूसरा सर्वाधिक आबादी वाला राज्य है। जबकि क्षेत्रफल के लिहाज से यह देश का तीसरा बड़ा राज्य है। यही नहीं अन्य सूबों के मुकाबले महाराष्ट्र सर्वाधिक धनी राज्यों में शुमार किया जाता है। इसके बावजूद वर्ष 2013-14 के रेल बजट में इस राज्य की उपेक्षा की गई है जो किसी भी प्रकार से स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि केंद्र ने राज्य के 80 लाख रेल यात्रियों की समस्याओं को नजरअंदाज किया है। जबकि राज्य के ढांचागत विकास में रेल वास्तविक जरूरत है। उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया कि रेल बजट में राज्य की अनदेखी का सीधा मतलब बड़ी आबादी जिसकी लाइफ लाइन ही रेल है, उसकी जानबूझकर उपेक्षा की गई है।
प्रधानमंत्री ने पवार को लंबित परियोजनाओं को रेल बजट में शामिल कराने का आश्वासन दिया है। राज्य की उपेक्षा से नाराज पवार ने रेल बजट के बाद प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर अपनी नाराजगी व्यक्त की थी। यही नहीं उसी दिन यूपीए समन्वय समिति की बैठक में भी उन्होंने अपनी नाराजगी दर्ज कराई थी। बैठक में यूपीए चेयरपर्सन और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी मौजूद थीं।