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मोदी के गांव में खुली शानदार 'काऊशाला', बेजोड़ हैं खूबियां

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वह दिन दूर नहीं जब सांसद नरेंद्र मोदी का आदर्श गांव जयापुर ब्रांड का दूध, धी, पनीर और मक्खन बाजार में बिकता नजर आएगा।
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पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की संस्था अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन के सहयोग से गांव में एक गोशाला खोली गई है। डेढ़ बीघे में फैली इस गोशाला को ‘काऊशाला’ नाम दिया गया है, जहां दो सौ गायों को रखने की व्यवस्था है। इस काऊशाला का दूध ही नहीं बल्कि गोबर और गोमूत्र भी बाजारों में बिकेगा।

सभी उत्पादों को ‘जयापुर ब्रांड’ से बेचने की योजना पर काम चल रहा है। गोशाला के संचालन की जिम्मेदारी भारतीय माइक्रो क्रेडिट नामक संस्था के पास है। फिलहाल काऊशाला में 27 मवेशी ही हैं। हालांकि इनमें दुधारू गायों की संख्या गिनती की है।
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काऊशाला की देखरेख करने वाले श्याम बिहारी कहते हैं, ‘यह पूर्वांचल की सबसे आधुनिक गोशाला है। गायों की हर सुख-सुविधा का यहां ख्याल रखा गया है।

दूध निकालने के लिए बाकायदा मशीन लगाई है। मवेशियों को ठंड से बचाने के लिए जमीन में रबर मैट बिछाई गई है। गर्मी के दिनों के लिए बड़े-बड़े कूलर की व्यवस्था है।’

बताया कि यहां दूध सुरक्षित रखने के लिए पूरा प्लांट बनाया गया है। इसी प्लांट में मक्खन और पनीर तैयार करने की सुविधा भी है। इतना ही नहीं आने वाले दिनों में गोमूत्र और गोबर के उपले भी बाजार में बेचने की योजना है।
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गाय खरीदने के लिए बीएमसी देगी कर्ज

जयापुर के लोग मवेशी खरीदकर यहां रखेंगे। गोशाला के कर्मचारी इन गायों की देखभाल करेंगे। इन गायों का दूध बाजार में बेचा जाएगा। रखरखाव पर होने वाले खर्च को काटकर मुनाफे का पैसा मवेशी के मालिक को मिल जाएगा। इससे उसे घर बैठे आमदनी होगी। इतना ही नहीं किसानों को मवेशी खरीदने के लिए गोशाला संचालित कर रही संस्था भारतीय माइक्रो क्रेडिट (बीएमसी) कर्ज भी देगी।

तो इस वजह से गोशाला का नाम पड़ा काऊशाला
जयापुर में आदर्श भारतीय काऊशाला का शिलान्यास 13 जुलाई 2015 को केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री चौधरी वीरेंद्र सिंह और केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण, उद्योग मंत्री हरसिमरत कौर

बादल ने किया था। काऊशाला असल में गोशाला ही है जहां गोवंश का संवर्धन होगा। शिलापट्ट पर लिखा ‘काऊशाला’ शब्द चौंकाने वाला है।

गांव के प्रधान नारायण पटेल कहते हैं, जब काऊशाला शब्द का जिक्र आया तो मेरे जेहन में भी सवाल उठा था। मैंने जब संस्था के लोगों इस बाबत पूछा तो उनका कहना था कि अमेरिका और इंडिया दोनों देशों के लोग इस फाउंडेशन के सदस्य हैं।

इसलिए अंग्रेजी और हिंदी को मिलाकर गोशाला को काऊशाला नाम दिया गया है। इसके पीछे दूसरी कोई और वजह नहीं है और न हिंदी को दोयम दिखाने की ही कोई मंशा है।

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