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क्या गणित में कमजोर होती हैं महिलाएं? उठा सवाल

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क्या महिलाओं के दिमाग की आनुवांशिक रचना ऐसी होती है कि वो गणित में खराब प्रदर्शन करें?
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सालों पहले अमेरिका के तत्कालीन वित्त सचिव और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट लॉरेंस समर्स ने ये कह कर विवाद खड़ा कर दिया था कि विज्ञान और इंजीनियरिंग में महिलाओं की संख्या कम होने का कारण गणित में उनकी कमजोरी हो सकती है।

लारेंस के बयान से महिलाएं ही नहीं बुद्घिजीवी भी नाराज हुए थे और खामियाजे में उन्हें अपना पद गंवाना पड़ा। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से उनकी छुट्टी हो गई।

आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ चंदा कोचर ने बिजनेस स्कूल में महिलाओें की कम संख्या के लिए प्रवेश परीक्षा में मौजूदा परिमाणात्मक योग्यता (क्यूए) पैटर्न को जिम्मेदार ठहराया है। चंदा कोचर के बयान के बाद महिलाओं की 'गणित की क्षमता' पर एक बार फिर बहस शुरु हो सकती है।
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चंदा ने कहा, बैंकों में अधिक महिलाओं की जरूरत

मानव संसाधन पर हुए सीआईआई के एक सम्मेलन में चंदा कोचर ने कहा कि एमबीए प्रवेश परीक्षा इतनी अधिक परिमाणात्मक (क्वांटिटेटिव) उन्मुख होती है कि यह लड़कियों को एमबीए में अधिक से अधिक दूर करती है।

उन्होंने कहा कि यदि प्रवेश परीक्षा को अधिक समग्र योग्यता पर आधारित रखा जाए तो आप महिलाओं की अधिक भागीदारी देखेंगे। बैंक से जुड़ने से पूर्व खुद बिजनेस स्कूल जाने की इच्छा रखने वाली कोचर ने कहा कि वर्तमान में बिजनेस स्कूलों में सिर्फ 10 से 15 प्रतिशत लड़कियां ही हैं।

कोचर ने कार्यस्थल को अधिक विविध बनाए जाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की अधिक भागीदारी से व्यवसाय में अच्छे परिणाम दिए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि जब आधी ग्राहक महिलाएं हो रही हैं ऐसे में ग्राहकों को समझने के लिए अधिक महिलाओं की जरूरत है।
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