अपनी मारक क्षमता बढ़ाने के लिए भारतीय वायुसेना की अगले साल तक अपने बेड़े में लड़ाकू विमान ड्रोन को शामिल करने की योजना है। वायुसेना यह विमान इजरायल से लेगी। इजरायल निर्मित 'हारोप' मानवरहित लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना को जम्मू और कश्मीर के ऊंचे स्थानों पर छिपे आतंकियों को निशाना बनाने की सहुलियत उपलब्ध कराएगा।
वायुसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस विमान के अगले साल तक हमारे बेड़े में शामिल किए जाने की उम्मीद है। इसके शामिल होने से परंपरागत और कम क्षमता वाली जंग में हमारी मारक क्षमता बढ़ेगी। आक्रामक हमलों के लिए 'हारोप' वायुसेना का पहला लड़ाकू विमान होगा। अमेरिका प्रीडेटर ड्रोन विमानों का अफगानिस्तान और पाकिस्तान में तालिबान के खिलाफ इस्तेमाल कर रहा है। प्रीडेटर ड्रोन मिसाइल दाग कर वापस लौट सकते हैं जबकि 'हारोप' स्व:संहारक हैं। 'हारोप' का निर्माण इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्री ने किया है।
इस बारे में भारत ने दो साल पहले 500 करोड़ की लागत का समझौता किया था। 'हारोप' 23 किलो वजन के हथियार ले जाने में सक्षम है। इसकी लंबाई 2.5 मीटर है। इसके अलावा इस विमान के पंख 3 मीटर लंबे हैं। यह विमान न केवल दुश्मनों के राडार को निशाना बना सकते हैं बल्कि इलेक्ट्रो ऑप्टिकल सेंसर के जरिए जंग के मैदान में रणनीति तय करने और निशाना तय करने में मदद करता है। डीआरडीओ भी इसी तरह के एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है।