भारतीय वायुसेना के एक जवान को अपने जाल में फंसाकर खुफिया जानकारी निकलवाने वाली महिला दामिनी मैकनॉट को लेकर एक अहम खुलासा हुआ है। खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक दामिनी पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन की फिदायीन हमलावर हो सकती है।
खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक दामिनी जिस आतंकवादी संगठन से जुड़ी है उसका मुख्यालय पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद में स्थित है। इस बात का खुलासा जांच के दौरान मिलिटरी इंटेलिजेंस अधिकारियों के सामने आए आंकड़ों के आधार पर किया जा रहा है। गौरतलब है कि हाल ही में वायुसेना के जवान रंजीत केके को वायुसेना से जुड़ी अहम जानकारी दामिनी मैकनॉट नामक एक युवती से साझा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक पूछताछ के दौरान रंजीत ने बताया कि युवती से वह पिछले कई महीनों से लगातार बातचीत कर रहा था। इस दौरान उसने भारत-ब्रिटेन की वायुसेना के बीच इसी साल हुए संयुक्त अभ्यास 'इंद्रधनुष' से जुड़ी अहम जानकारियां साझा की थी।
पाकिस्तानी आतंकी संगठन की ओर इशारा
जांच के दौरान इस बात का भी खुलासा हुआ है कि दोनों के बीच व्हाट्सएप और स्काइप पर लंबी बातचीत हुई। इन दोनों के बीच काफी अंतरंग बातें भी होती थी। फिलहाल इस मामले में जांच जारी है और जैसे जैसे यह जांच आगे बढ़ रही है उसमें नई परतें सामने आ रही हैं।
दामिनी और रंजीत के बीच हुई बात के दौरान जियो सैटेलाइट प्रणाली की जो जानकारियां सामने आई है उसने खुफिया अधिकारियों को अपनी छानबीन केवल पाकिस्तान तक सीमित रखने के लिए बाध्य किया। इसके अलावा दामिनी जिस इंटरनेट प्रोटोकॉल एड्रेस के जरिए फेसबुक का इस्तेमाल कर रही थी उससे भी पाकिस्तान की ओर ही इशारा जाता है।
इन आंकड़ों के सामने आने के बाद सैन्य खुफिया अधिकारियों ने अपने जांच अभियान को पाकिस्तान में बैठे आतंकी संगठनों पर केंद्रीत कर लिया है। हालांकि, वे इसके विभिन्न पहलुओं की भी जांच कर रहे हैं।
कौन है दामिनी मैकनॉट
दामिनी मैकनॉट का नाम वायुसेना के एक कर्मचारी को अपने जाल में फंसाने और उससे खुफिया जानकारी निकलवाने के बाद सामने आया था। लेकिन उसके बारे में जो जानकारी अब तक सामने आई है उससे केवल ये बातें ही पता चलती हैं।
रंजीत से बातचीत के दौरान कथिततौर पर आईएसआई की जासूस या दामिनी मैकनॉट ने खुद को ब्रिटेन स्थित एक मीडिया संस्थान की कर्मचारी के रूप में पेश किया था। उसे अपने लेख के लिए भारतीय वायु सेना से जुड़ी कुछ जानकारियों की जरूरत थी। हालांकि, उसकी पहचान अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है।
दामिनी ने रंजीत को अपने जाल में फंसाया जिससे की वह वायुसेना से जुड़ी खुफिया जानकारी हासिल कर सके। इसके लिए उसने फेसबुक का रास्ता अपनाया। दामिनी ने सितंबर के महीने में उस वक्त संपर्क स्थापित किया जब वह (रंजीत) मिलिटरी अस्पताल में अपना ईलाज करवा रहा था। इस दौरान उसने इंटरनेट प्रोटोकॉल आधारित वाइस कॉल के जरिए उसका इंटरव्यू लिया।
इस दौरान रंजीत ने उसे कई अहम जानकारियां साझा की जिसमें एयरक्रॉफ्ट के मुवमेंट से लेकर कई यूनिटों की तैनाती जैसी सूचनाएं शामिल थी। धीरे-धीरे इन दोनों के बीच बातचीत बढ़ती गई और दामिनी ने रंजीत को और ज्यादा खुफिया जानकारी इकट्ठा करने का काम सौंपा। इसके बदले रंजीत के बैंक अकाउंट में पैसे भी जमा कराए गए। हालांकि, इस बात का अब तक पता नहीं चल पाया है कि क्या केवल रंजीत ही इस 'हनीट्रैप' का शिकार हुआ है या फिर कई अन्य अधिकारी भी इसमें शामिल है। फिलहाल दो हजार से ज्यादा सेना के अधिकारियों की प्रोफाइल आईबी और रॉ के रडार पर हैं।