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कोलगेटः सरकार से रिपोर्ट साझा करने पर सीबीआई की खिंचाई

Tue, 30 Apr 2013 01:29 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
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कोयला घोटाले पर सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट की जानकारी सरकार के साथ साझा करने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई है। अदालत का कहना है कि रिपोर्ट साझा करने से पूरी प्रक्रिया पर असर पड़ा है।
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सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के साथ रिपोर्ट साझा करने पर पूछा कि उसे अंधेरे में क्यों रखा गया? अदालत ने सरकार की खिंचाई करते हुए कहा कि सीबीआई के हलफनामे में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई है।

अब यह जरूरी हो गया है कि सीबीआई को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त किया जाए। सीबीआई की स्वतंत्रता की स्थिति फिर से बहाल करना आवश्यक है।

सीबीआई को भी लगाई फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को भी फटकार लगाते हुए कहा कि उसे राजनीतिक आकाओं से निर्देश लेने की जरूरत नहीं है।

अदालत ने सीबीआई को नए सिरे से 6 मई तक हलफनामा देने का आदेश दिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 8 मई को होगी।

इसके अलावा अब सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई के वकील यूयू ललित होंगे। यूयू ललित अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल (एएसजी) हरेन रावल की जगह लेंगे।

कोयला घोटाले पर बुरी तरह घिरी सरकार
इधर कोयला घोटाले पर सरकार बुरी तरह घिरती जा रही है। सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट के बारे में हुए नए खुलासे से सरकार के अंदर हड़कंप मच गया है।

उधर, रिपोर्ट में 15 से 20 फीसदी बदलाव के नए खुलासे के बाद विपक्ष के तेवर और तीखे हो गए हैं।

भाजपा ने सोमवार को भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कानून मंत्री अश्विनी कुमार के इस्तीफे की मांग पर लगातार छठे दिन संसद का कामकाज ठप रखा।

लिहाजा, संसद के बजट सत्र के बचे दिनों के भी हंगामे की भेंट चढ़ने के आसार बन गए हैं।

सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट को लेकर नए खुलासे के बाद सोमवार को कोयला बम ने विकराल रूप ले लिया।

विपक्ष ने पीएम और कानून मंत्री के इस्तीफे की मांग के साथ ही इस बात का स्पष्ट संकेत दे दिया है कि वह आने वाले दिनों में भी संसद चलने नहीं देगा।

सीबीआई रिपोर्ट में 20 फीसदी तक बदलाव
ताजा खुलासे में बताया गया कि सीबीआई की 8 मार्च और 26 अप्रैल की स्टेटस रिपोर्ट में काफी अंतर है। सरकार की ओर से रिपोर्ट में 15 से 20 फीसदी छेड़छाड़ की गई है।
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रिपोर्ट में बदलाव कानून मंत्री और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के कहने पर करने की बात सामने आई है।

बताया जा रहा है कि सीबीआई की मूल रिपोर्ट में कई अधिकारियों और मंत्रालय की भूमिका का विस्तृत उल्लेख किया गया था।

'मुझे बलि का बकरा बनाया'
इधर सुप्रीम कोर्ट में कोयला घोटाला मामले की सुनवाई के पहले ही केंद्र सरकार के कानूनी अधिकारियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरु हो गया।

अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल हरीन रावल ने आरोप लगाया है कि कोयला घोटाले की जांच कर रही सीबीआई के कामकाज में अटॉर्नी जनरल जी ई वाहनवती ने हस्तक्षेप किया था और उनको ''बलि का बकरा'' बनाया।

रावल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि आठ मार्च को सुप्रीम कोर्ट में जो स्टेटस रिपोर्ट पेश की गई थी, वह सरकारी अधिकारियों के साथ साझा नहीं की गई है।

एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में कोयला घोटाले की सुनवाई कर रही न्यायालय की पीठ के न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे चेलामेश्वर की जगह न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ ने ली है।

इस पीठ में न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति आर एम लोढा होंगे।

सरकार को नहीं सूझ रहा रास्ता
दूसरी ओर, नए हालात में सरकार को गतिरोध खत्म करने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है। सूत्रों का कहना है कि सरकार का एक खेमा संसद का बजट सत्र समय से पहले स्थगित करने की राय दे रहा है तो दूसरा खेमा इसके खिलाफ है।
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उसका कहना है कि इससे यह संदेश जाएगा कि सरकार विपक्ष के सामने भाग खड़ी हुई।

गतिरोध सुलझाने की सरकार की कशमकश के बीच सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में 30 अप्रैल को फिर सुनवाई होगी। सरकार और कांग्रेस दोनों की इस पर विशेष नजर है।

इन सबके बीच, कांग्रेस और सरकार ने अब भी मुश्किल में फंसे कानून मंत्री का बचाव करना नहीं छोड़ा है।

कांग्रेस प्रवक्ता संदीप दीक्षित ने कहा कि कानून मंत्री एक वरिष्ठ नेता और वकील हैं। रिपोर्ट की विषयवस्तु के साथ छेड़छाड़ की बात ठीक नहीं है।

उन्होंने कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इस संबंध में उसका मत ही अंतिम माना जाएगा।

वैसे नए खुलासे के बाद विपक्ष के हमले के साथ ही मीडिया के सामने पार्टी और सरकार का बचाव करना कांग्रेस के लिए मुश्किल पड़ रहा है।
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