भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कहा है कि उन्होंने आयकर अधिकारियों को कभी धमकी नहीं दी। उनका बयान इस मामले में भारतीय राजस्व संघ द्वारा माफी की मांग किए जाने के बाद आया है। उन्होंने कहा है कि मुझे आयकर विभाग की ईमानदारी पर पूरा भरोसा है। पार्टी कार्यकर्ताओं की सभा में दिए गए मेरे बयान को तोड़मरोड़ कर पेश किया गया है।
गौरतलब है कि शुक्रवार का भाजपा अध्यक्ष पद से मुक्त होने के बाद नितिन गडकरी नागपुर में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि जब भाजपा की सरकार केंद्र की सत्ता में होगी तो उनके पूर्ति ग्रुप में संदिग्ध निवेश की जांच कर रहे अधिकारियों को बचाने के लिए न तो चिदंबरम आएंगे और न सोनिया गांधी।
रविवार को पूर्ति समूह में निवेश की जांच करने वाले आयकर अधिकारियों को कथित तौर पर धमकी देने के मामले में आयकर अधिकारियों की सर्वोच्च संस्था ने भारतीय राजस्व सेवा संघ (अखिल भारतीय निकाय) गडकरी से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की और जांच अधिकारियों को सुरक्षा मुहैया कराने की अपील की। साथ ही संस्था ने कहा कि गडकरी की धमकी का मकसद निष्पक्ष जांच में बाधा पहुंचाना है।
संस्था की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि राष्ट्रीय समाचार पत्रों में इस संबंध में प्रकाशित खबरों से उसे गहरी चिंता और दुख हुआ। खबरों में पूर्ति समूह में निवेश की जांच करने गए आयकर अधिकारियों को गडकरी की ओर से धमकी देने का उल्लेख है। संस्था ने राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक द्वारा इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किए जाने की निंदा करते हुए कहा है कि गडकरी को बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए। उल्लेखनीय है कि पूर्ति समूह गडकरी की कंपनी है।
आयकर अधिकारियों की बैठक में पारित प्रस्ताव में गडकरी के इस बयान को अपमानजनक करार दिया गया। साथ ही आयकर अधिकारियों ने कहा कि गडकरी की ओर से तथाकथित तौर पर धमकी देने का मकसद टैक्स चोरी के इस मामले की निष्पक्ष जांच में बाधा पहुंचाना है। पूर्ति समूह के खिलाफ मुंबई, नागपुर और पुणे का आयकर विभाग जांच कर रहा है। इस मामले में गडकरी को एक फरवरी को स्वयं उपस्थित होने के लिए कहा गया है।