उमा भारती के दिल में दर्द है, उनको दुख है कि उन्हें जितना सम्मान दिया जाना चाहिए था वो उनको नहीं मिला। एक अंग्रेजी अखबार से बात करते हुए उनके दिल का ये दर्द जुबां पर आ गया।
उमा ने कहा कि,"मैंने अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए लेकिन मुझे उतना सम्मान नहीं मिला जितने की मैं हकदार थी।
उन्होंने कहा कि मुझे शिवराज सिंह चौहान से कुछ अधिक सम्मान की उम्मीद थी जो मुझे नहीं मिला लेकिन मुझे खुशी है कि उन्होंने उन कामों को आगे बढ़ाया जिनको मैंने शुरु किया था।
मोदी की जाति पर ये बोलीं उमा
बीजेपी में ओबीसी नेताओं के उदय से जुड़े एक सवाल पर उन्होंने कहा कि जब मोदी को पीएम पद का उम्मीदवार बनाया गया तब जाति को ध्यान में बिल्कुल नहीं रखा गया।
उन्होंने कहा कि पार्टियां जाति आधारित राजनीति छोड़ कर मुद्दों पर बात करें क्या ये अच्छी बात नहीं है? बीजेपी का ये कदम लालू और मुलायम जैसे नेताओं के लिए एक सबक है।
बुंदेलखंड के बारे में ये है उमा की सोच
क्या वे अलग बुंदेलखंड चाहती हैं? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि बीजेपी हमेशा छोटे राज्यों के पक्ष में रही है। जहां तक बात बुंदेलखंड की है तो इसकी तस्वीर अभी साफ नहीं है।
उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड पर कोई अंतिम निर्णय करने से पहले एक बार विचार विमर्श होना चाहिए।
बुंदेलखंड में चार लोकसभा सीटें हैं, 2009 में पूरी तरह यहां से बीजेपी का सफाया हो गया था। इस मुद्दे पर उमा बताती हैं कि 2009 में मुद्दे अलग थे। सपा और बसपा ने जातियों के आधार पर ध्रुवीकरण किया था।
'भरोसा ही मेरी इमेज है'
उमा ने कहा कि,"अब हालात बदल गए हैं। विकास ही अब मुख्य मुद्दा है। जनता परेशान है- भ्रष्टाचार से, अपराधों से और बेरोजगारी से। जनता भरोसेमंद नेता चाहती है और यही मेरा आधार है।"
फायरब्रांड साध्वी से आप विकास के मुद्दे पर आ गईं? क्या से इमेज बदलने की कोशिश है? इन सवालों पर उमा ने कहा कि इमेज बदलने की नहीं है। राम जन्मभूमि के मुद्दे से पहले भी मैं बुंदेलखंड में गरीबों पर हो रहे अत्याचार के मुद्दे उठाती रही थी।