पंचायतों की बैठकों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की जगह उनके परिजनों की मौजूदगी पर कड़े रुख के बाद अफसरों के निरीक्षण में भी वही फार्मूला अपनाया जाएगा। पंचायती राज निदेशक ने पंचायतों के निरीक्षण पर जाने वाले अफसरों से कहा है कि यदि निरीक्षण वाली पंचायतों की अध्यक्ष, प्रमुख या प्रधान महिला हैं तो मौके पर सिर्फ उनसे ही बात करें, परिजनों को कोई अहमियत न दें।
निदेशालय को शिकायतें मिलती रही हैं कि जब अधिकारी पंचायतों के भ्रमण पर जाते हैं तो कई बार यह बात सामने आती है कि त्रिस्तरीय पंचायतों के निर्वाचित महिला अध्यक्ष, प्रमुख और प्रधान की जगह उनके परिजन या सबंधी प्रस्तुतिकरण के लिए आ जाते हैं। वे इस तरह वहां पेश होते हैं जैसे वहां की निर्वाचित प्रतिनिधि महिलाएं नहीं बल्कि वे ही हैं।
पंचायती राज निदेशक वीपी सिंह ने अफसरों से कहा है कि वे निरीक्षण के लिए जाने पर निर्वाचित महिला पदाधिकारियों को ही संज्ञान में लें। ऐसा करने से न सिर्फ महिला पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा स्वयं विचार अभिव्यक्ति करने से पंचायती राज व्यवस्था मजबूत होगी बल्कि महिलाओं में नेतृत्व का विकास भी हो सकेगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कार्यवाही सुनिश्चित कराने के लिए जिलाधिकारियों को पत्र भेज दिया गया है।
कागजी बैठकों पर वीडियोग्राफी का चेक
त्रिस्तरीय पंचायतों की अब कागजी बैठकें नहीं हो सकेंगी। पंचायती राज निदेशालय ने जिला पंचायत से लेकर ग्राम पंचायत तक की समस्त बैठकों की वीडियोग्राफी कराना अनिवार्य कर दिया है। इस व्यवस्था में बहुत साफ कहा गया है कि ये वीडियोग्राफी अभिलेखों के रूप में होगी।
यानी कि वहां लोगों की उपस्थिति से लेकर विचार-विमर्श और निर्णय तक सारी जानकारी रिकॉर्ड होगी। इससे पंचायतों में निर्वाचित प्रतिनिधियों पर गुपचुप बैठकें करने, बिना बैठक किए कागजी कोरम पूरा करने और नियमित बैठक न करने जैसी शिकायतें रुकने की संभावना है।