पत्नी द्वारा एचआईवी टेस्ट न कराने से नाराज पति ने बांबे हाईकोर्ट में तलाक के लिए याचिका दायर की थी, जिस पर अदालत ने सुनवाई करते हुए क्रूरता के आधार पर खारिज कर दिया।
ईसाई दंपति ने 2009 में शादी रचाई थी, मगर पत्नी के साथ छह महीने बिताने के बाद ही पति ने तलाक की अर्जी दे दी।
पत्नी के अक्सर बीमार रहने और सिर्फ घर पर खाना खाने से पति को संदेह हुआ कि उसकी पत्नी एचआईवी से पीड़ित है।
अपनी अर्जी में उसने यह भी दावा किया कि उसने एक बार अपनी पत्नी को एचआईवी की दवा खाते देखा था। मगर वह अपने दावे को साबित कर पाने में नाकाम रहा।
कोर्ट ने अर्जी को खारिज करते हुए कहा कि यह बेहद बेतुका है। यह सिर्फ पति के दिमाग की उपज है। यदि आप अपनी पत्नी के साथ नहीं रहना चाहते तो इसमें उसकी भी रजामंदी हासिल करनी चाहिए।