खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश के मुद्दे पर विपक्ष के तीखे तेवरों से सरकार का सियासी संकट बढ़ गया है। मौका देख सरकार की साथी द्रमुक ने भी कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ाने का दांव फेंक दिया है। लिहाजा, सरकार और कांग्रेस के मैनेजरों ने कील कांटे दुरुस्त करने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। विपक्ष की चुनौती को स्वीकार करते हुए कांग्रेस और सरकार ने हर हमले का जवाब जोरदार तरीके से देने का दावा किया है।
रिटेल में एफडीआई के मुद्दे पर सरकार की राह पथरीली करने के लिए भाजपा ने विरोधी पार्टियों को एकजुट करने का ऐलान किया है। भाजपा की रणनीति से कांग्रेस के मैनेजरों में सियासी सिरहन दौड़ गई है। संसद के अंदर नंबर और बाहर विपक्ष पर मीडिया के सामने काबू पाने की रणनीति को सिरे चढ़ाया जा रहा है।
कांग्रेस के रणनीतिकारों का तर्क है कि कई क्षेत्रीय दल भले ही क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए खुदरा क्षेत्र में एफडीआई का विरोध कर रहे हो लेकिन एफडीआई लागू करते समय राज्यों को इसे अमल में लाने या न लाने की छूट देकर उन्हें संसद में यूपीए सरकार को समर्थन देने का सुनहरा मौका दिया गया है। पार्टी के रणनीतिकार ने कहा कि इसी को भुनाते हुए ज्यादातर क्षेत्रीय दल यूपीए सरकार को समर्थन देने का ऐलान करेंगे। इसका प्रमाण संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान विपक्ष के हंगामे के दौरान दे दिया जाएगा।
साथ ही मीडिया के सामने भी विपक्ष को तगड़ा जवाब देने के लिए कांग्रेस खास रणनीति बना रही है। प्रवक्ताओं की फौज के साथ साथ कुछ मुखर सांसदों को संसद के अंदर और बाहर जवाबी हमला बोलने के लिए कहा जा सकता। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने कहा कि सरकार और कांग्रेस हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। संसद का शीत सत्र शुरू होने दें। नतीजे आपके सामने खुद आ जाएंगे।