आईएएस में इस बार बड़ी असफलता ने प्रतियोगी छात्रों की चिंता बढ़ा दी है। प्रारंभिक परीक्षा में ही हिंदी भाषी प्रतियोगी पिछड़ जा रहे हैं इसका उदाहरण मुख्य परीक्षा और अंतिम परिणाम में सामने है।
विज्ञापन
सीनियर छात्रों और विशेषज्ञों का कहना है कि अब तैयारी का प्रारूप बदलना होगा। अब जोर देना होगा कि प्रारंभिक परीक्षा में बड़ी सफलता मिल सके। एक दौर था जब मुख्य परीक्षा में शामिल होने वाले 40 फीसदी अभ्यर्थी इलाहाबाद के हुआ करते थे।
अभ्यर्थियों की बड़ी संख्या के कारण कई कालेजों को मुख्य परीक्षा का केंद्र बनाना पड़ता था। फाइनल रिजल्ट में औसतन 70 से 80 अभ्यर्थी इलाहाबाद के होते रहे हैं लेकिन आईएएस-2013 में इलाहाबाद के मात्र 34 अभ्यर्थी इंटरव्यू में शामिल हुए। मुख्य परीक्षा भी उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग तक सीमित हो गई है।
विज्ञापन
क्यों पिछड़ रहे हिन्दी पट्टी के प्रतियोगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि पहले के पाठ्यक्रम में विषयों की महत्वपूर्ण भूमिका होती थी और मानविकी के विषय लेकर अभ्यर्थी सामान्य अध्ययन में औसत प्रदर्शन करते हुए भी प्रारंभिक परीक्षा में बाजी मार लेते थे। सीसैट लागू होने से विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम का प्रारंभिक परीक्षा में योगदान नगण्य हो गया है।
इसके विपरीत प्रतियोगी नए प्रारूप को अभी समझ ही नहीं पाए हैं। विशेषज्ञ इसके पीछे यहां की पृष्ठभूमि तथा अधिकतर भर्तियों के लंबित होने से उत्पन्न भटकाव को भी मुख्य कारण मान रहे हैं।
पहले बदलाव का मकसद समझें अभ्यर्थी
-संघ लोक सेवा आयोग के अनुसार वह अभ्यर्थियों को जानकारी के स्तर के साथ निर्णय लेने की क्षमता, परिस्थितियों की समझ, सिविल सेवा में कॅरियर संबंधी सामान्य जानकारी आदि बिंदुओं पर परखना चाहता है। कुछ महत्वपूर्ण बिंदु निम्न हैं- -बौद्धिक गुण तथा गहन समझ -सिविल सेवा में कॅरियर संबंधित सामान्य जानकारी - प्रारंभिक विषयों के बारे में आधारभूत समझ -सामाजिक-आर्थिक लक्ष्यों, उद्देश्यों और मांगों का विश्लेषण तथा इन पर दृष्टिकोण अपनाने की समझ -इन सभी विषयों पर संगत, सार्थक तथा सारगर्भित उत्तर देने की क्षमता -सत्यनिष्ठा, ईमानदारी से संबंधित विषयों के प्रति सकारात्मक अभिवृत्ति एवं दृष्टिकोण -समाज के आचार व्यवहार से विभिन्न मुद्दों तथा सामने आने वाली समस्या के समाधान को लेकर तार्किक मनोवृत्ति
सिर्फ गणित, रिजनिंग तक सीमित नहीं है सीसैट
विशेषज्ञ सौरभ निरंजन के मुताबिक आम धारणा बन गई है कि गणित, रिजनिंग और अंग्रेजी ही सीसैट है। प्रतियोगियों को यही बताया भी जा रहा है। जबकि, सीसैट के पेपर में कुल 80 में 30 से 35 सवाल ही इन तीन विषयों से होते हैं। 45 से 50 प्रश्न संप्रेषण एवं संचार कौशल, निर्णयन एवं समस्या समाधान, कॉम्प्रिहेन्सन (गद्यांश आधारित) से होते हैं। इन बिन्दुओं पर ध्यान न देना असफलता का मुख्य कारण है।
इन 50 सवालों के लिए अभ्यर्थियों को समसामयिक घटनाओं की केस स्टडी करनी चाहिए। घटनाओं तथा अलग-अलग मामलों में लिए गए निर्णयों को आधार बनाकर अध्ययन किया जाना चाहिए। समाचार पत्रों और प्रतियोगी पत्रिकाओं के अलावा प्रमुख सरकारी विभागों की वेबसाइट का नियमित अध्ययन आवश्यक है। पीएमओ की वेबसाइट पर अवश्य जाएं और अपडेट देखें।
विशेषज्ञ विवेक दुबे का कहना है कि कॉम्प्रिहेन्सन वाले सवालों को हल करने के लिए उसे पूरी समझ के साथ स्पीड से पढ़ने की जरूरत है। इसके लिए प्रैक्टिस की जरूरत होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि आईएएस में यहां के प्रतियोगियों की असफलता का कारण अन्य भर्तियों में लगातार विवाद तथा बेवजह लंबित होना है। इससे भ्रम बढ़ा है।
रनीश जैन का कहना है आईएएस परीक्षा ऊर्जावान अभ्यर्थियों की मांग करता है लेकिन दो-तीन वर्षों से उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग समेत अन्य संस्थाओं को लेकर विवाद बढ़ा है। काफी समय से भर्तियां लंबित हैं।
परीक्षा कार्यक्रमों में रोजाना बदलाव, आंदोलन आदि कई कारण हैं, जिससे प्रतियोगियों का भटकाव हो रहा है। भर्तियों को नियमित और पारदर्शी बनाना होगा।