मासूम को हवस का शिकार बनाकर उसका जीवन नर्क बनाने वाले को सजा दिलाने की समाजसेवी महिलाओं की पहल समझौते तक ही सिमट कर रह गई। पीड़ित बच्ची की इज्जत का वास्ता देकर आरोपी को सजा के तौर पर लानतें देकर मामला निपटा दिया गया। अगर दुराचार के आरोपियों को ऐसे ही माफी दी जाती रही तो ये घटनाएं कैसे रुकेंगी?
यौन शोषण की शिकार बालिका को न्याय दिलाने के लिए तीन समाजसेवी महिलाएं निशा अग्रवाल, डॉ.रजनी शर्मा एवं आयशा सिद्दीकी ने कुछ आवाज उठाई थी, लेकिन समाज को झकझोर कर रख देने वाली यह घटना महिला सशक्तिकरण का दम भरने वाले संगठनों के हो-हल्ले को आईना दिखाने वाली साबित हुई। अखबार की सुर्खियां बनने के बावजूद कहीं से कोई आवाज नहीं उठी। महिलाएं भी चुप्पी साधे रहीं।
आयशा सिद्दीकी के आवास पर मंगलवार की देर शाम दोनों पक्षों में वार्ता हुई। पीड़ित बालिका के परिवार ने दुराचारी युवक के परिजनों की माफी की गुहार को तरजीह दी। उधर, युवक ने अपनी करतूत के लिए माफी मांगी, जिसके चलते समाजसेवी महिलाओं ने बालिका पक्ष के निर्णय पर न चाहते हुए भी अपनी मौन स्वीकृति की मुहर लगा दी।