भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी इन दिनों पूरी तरह चुनावी मौसम में रंगे नजर आ रहे हैं। वह कर्नाटक में चुनावी रैली को संबोधित करते हैं, लेकिन उनका निशाना कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी होते हैं।
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जो मुद्दा सबसे गर्म हो, उस पर सियासी हथौड़ा चलाना ही राजनीति का पहला सबक है और मोदी इस खेल के मंझे खिलाड़ी हैं। वो भले कर्नाटक के दावनगिरि में संबोधित कर रहे थे, लेकिन उन्हें इस बात का इल्म था कि जो भी बोलेंगे, सो देश भर तक पहुंच जाएगा।
दक्षिण भारत में खड़े होकर उन्होंने उसी इलाके का सबसे बड़ा मुद्दा उठाया। कर्नाटक में मोदी को सबसे पहले तेलंगाना याद आया। और उन्हें सीमांध्र के जख्म भी खूब दिखे। जब मोदी इस रैली को संबोधित कर रहे थे, उसके कुछ देर बाद ही लोकसभा में तेलंगाना बिल पारित कर दिया गया। और कांग्रेस का साथ दिया धुर विरोधी भाजपा ने। मोदी ने राजनीतिक पिच पर डबल गेम खेल डाला।
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तेलंगाना पर कांग्रेस को कोसा
गुजरात के मुख्यमंत्री और देश का अगला पीएम बनने का ख्वाब देख रहे नरेंद्र मोदी ने आंध्र के बंटवारे के मुद्दे पर कांग्रेस को खूब कोसा। उन्होंने कहा, "सोनिया गांधी और राहुल गांधी दक्षिण भारत आते हैं। कर्नाटक में रैली करके चले जाते हैं। लेकिन बराबर में आंध्र हैं, हैदराबाद है वहां जाने का वक्त उनके पास नहीं होता।"
मोदी ने कहा, "कांग्रेस सत्ता के नशे में हैं। उसमें अहंकार भरा हुआ है। सीमांध्र के लोगों को जख्म दिए गए हैं। उनके लिए दिक्कत खड़ी कर दी गई हैं। लेकिन कांग्रेस के पास इन पर मरहम लगाने का वक्त नहीं है।"
भाजपा के पीएम पद के दावेदार ने कहा, "सीमांध्र के लोगों के लिए कुछ किया जाना चाहिए। उनकी तकलीफें दूर करने की कोशिश होनी चाहिए। लेकिन कांग्रेस यह सब नहीं सोचती।" तेलंगाना बिल पर विचार के दौरान एक सांसद के पेपर स्प्रे छिड़कने पर भी उन्होंने चुटकी ली थी। उन्होंने कहा, "पहले कांग्रेस के नेता देश की आंखों में धूल झोंकते थे, अब मिर्ची झोंकने लगे हैं।" लेकिन इन बयानों के पीछे मोदी कोई और चाल चल रहे थे।
मोदी के कहने पर भाजपा ने पास कराया बिल
यह खेल क्या था, इसका राज तेलंगाना बिल के पारित होने के बाद खुला है। दरअसल, भाजपा ने तेलंगाना पर अपनी राजनीति की इबारत एक दिन पहले रविवार को ही लिख दी थी। नरेंद्र मोदी ने रविवार को पार्टी नेताओं से इस बारे में फोन पर बातचीत की थी।
शायद इसी फोन कॉल की वजह भाजपा ने तेलंगाना बिल को पारित करने के लिए कांग्रेस की राह खोल दी। रविवार को चंडीगढ़ में टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू से मुलाकात की थी। इसके बाद उसी शाम भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के घर पर पार्टी के संसदीय दल की बैठक हुई।
बैठक में भाजपा ने अपने रुख में नरमी लाने का फैसला किया। इससे पहले उसका कहना था कि कांग्रेस को यह बिल संसद में बहस के पारित नहीं कराना चाहिए। और मंगलवार को सीमांध्र की चिंताओं को उठाने के बाद पार्टी ने बिल पारित कराने का फैसला किया।
आडवाणी की फिर न चली
तेलंगाना मुद्दे पर भाजपा की दिशा एक बार फिर नरेंद्र मोदी ने तय की और लालकृष्ण आडवाणी के पाले में शिकस्त आई। ऐसा इसलिए, क्योंकि आडवाणी हमेशा से यह अंदाज अपनाने के खिलाफ थे और उनका कहना था कि विस्तृत बहस के बाद ही तेलंगाना पर कदम उठाया जाना चाहिए।
बुधवार को राज्यसभा में भाजपा संभवतः सीमांध्र की चिंताओं को ध्यान में रखकर चार संशोधन सामने रख सकती है। पार्टी के वरिष्ठ नेता ने कहा, "भाजपा की मंशा इस कानून का रास्ता रोकने की नहीं थी। हम चाहते थे कि सरकार हमारे संशोधन स्वीकार कर ले। वह ऐसा न करती, तो भी हम शायद इस बिल का समर्थन करते।"
रविवार को नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात में टीडीपी चंद्रबाबू नायडू ने जोर दिया था कि भाजपा के नेता जो बयान जनता के सामने दे रहे हैं, उनसे राज्य में विरोधाभासी संकेत जा रहे हैं।
चंद्रबाबू नायडू भाजपा के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन करना चाहते हैं और उनका मानना है कि तेलंगाना पर पार्टी के रुख से सीमांध्र इलाके में टीडीपी की संभावनाओं को चोट पहुंच सकती है। टीडीपी प्रमुख ने चेताया था कि भाजपा के कदम से सीमांध्र के लोग खफा हो सकते हैं और तेलंगाना कांग्रेस के पाले में जा सकता है।
इस बीच कांग्रेस पर हमला बोलने में भाजपा आगे रही। सुषमा स्वराज ने कहा, "कांग्रेस डबल गेम खेल रही है। अगर हम इसका विरोध करते, तो सरकार ठीकरा हमारे सिर फोड़ती। भाजपा के बिना बिल पास नहीं हो सकता था।" पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह का कहना था, "सरकार को सीमांध्र और आंध्र के दूसरे इलाकों की चिंताएं दूर करने के लिए ठोस उपायों के साथ सामने आना चाहिए।"
दरअसल, सियासत इसी चिड़िया का नाम है। चुनाव सिर पर हैं, ऐसे में हर पार्टी बिसात पर अपने मोहरों को ठीक तरह से रख लेना चाहती है। मोदी ने भी कुछ यही किया। संसद में बिल पारित करवाया और चुनावी रैलियों में कांग्रेस को इसी के लिए लपेटा भी।