फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ब्रांड इंडिया: क्या है मोदी के करिश्मे की हकीकत

विज्ञापन
विज्ञापन
अमेरिकी पत्रिका टाइम ने दो साल पहले उस समय के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर एक अंक निकाला। अंक का शीर्षक था- दी अंडरएचीवर। पत्रिका ने मनमोहन को जो उपाधि दी, उस पर हंगामा होना तय था। हंगामे से भारतीय राजनीति में हलचल भी हुई और उद्योग जगत की चूले भी हिल गईं।
विज्ञापन


उसी टाइम ने ताजा अंका नरेंद्र मोदी पर निकाला है। अंक का शीर्षक है- व्हाई मोदी मैटर्स। यही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करिश्मा है। जानकार इसे 'ब्रांड मोदी' भी कहते हैं। ब्रांड मोदी एक तिलिस्म भर है, या दावे की जमीनी हकीकत भी है, ये पड़ताल जरूरी है। आइए एक नजर डालते हैं ब्रांड इंडिया के लिए किए गए कामों पर और जानते हैं कि क्या है इसकी हकीकत।

 
विदेश यात्राएं

26 मई 2014 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शपथ ली उसके 21 दिन बाद से ही उन्होंने विदेश यात्राएं करना शुरू कर दिया। 2014 की बात करें तो अक्टूबर और दिसंबर महीने को छोड़कर प्रधानमंत्री ने हर महीने विदेश यात्रा की।
विज्ञापन


2015 में भी वे 6 मुल्कों की यात्रा कर चुके हैं। अगले सप्ताह मोदी चीन, मंगोलिया ओर दक्षिण कोरिया की पांच दिवसीय यात्रा पर जा रहे है। मोदी अपनी हर विदेश यात्रा में भारत विदेश में भारत के बारे में बातें बोलने से कभी नहीं चूकते हैं।

फ्रांस की यात्रा के दौरान मोदी ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति ओलांद के साथ नाव पर चर्चा की। इस यात्रा के दौरान ही 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने का फैसला किया गया। तीन स्मार्ट शहर बनाने में भी फ्रांस की ओर से मदद का वादा किया गया।

एनआरआई लोगों से मिलना

मोदी ने विदेशों की यात्राएं तो की हैं, लेकिन सिर्फ इकोनॉमिक डील को अंजाम नहीं दिया, बल्कि विदेशों में रह रहे कुछ भारतीयों से भी मुलाकात की। इससे पहले भी देश के प्रधानमंत्री विदेश यात्रा करते थे, लेकिन उनकी इतनी अधिक चर्चा नहीं होती थी।

एनआरआई लोगों से बात करना भी ब्रांड इंडिया को विदेश में बढ़ावा दे रहा है। बाहर बसे भारतीय इससे देश की संस्कृति से जुड़े रहते हैं और उन्हें इस बात का एहसास रहता है कि भले ही वह विदेश में हैं, लेकिन उनके देश का प्रधानमंत्री उन्हें भूला नहीं है।

हर मंच पर पहुंचाई भारतीय संस्कृति

जर्मनी के बर्लिन में मोदी एंजेला मार्केल से मिले थे। वहां पर मोदी ने जर्मनी से हुई डील को ध्यान में रखते हुए भारत का नाम सीधे न लेकर कुछ इस अंदाज में अपनी बात रखी- भारत का शेर और जर्मनी की चील (ईगल) मिलकर अच्छे पार्टनर बनेंगे।

इसी तरह मोदी अपने हर विदेश दौरे पर भारत की संस्कृति की बात करना नहीं भूलते हैं। जहां भी वे जाते हैं, वहां पर किसी न किसी बहाने से भारत की तरीफ करने से न चूकना उनका एक खास अंदाज है।

तारीफों के पुल हैं सबूत

मोदी की विदेश यात्राओं के बाद मोदी की तारीफों के भी खूब पुल बांधे गए हैं। जर्मनी की चांसलर एंजेला मार्केल ने मोदी की तारीफ की थी। वहीं दूसरी ओर ओबामा और मोदी के बीच कैसा संबंध है, यह तो गणतंत्र दिवस के बाद मोदी और ओबामा की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने ही साफ कर दिया था।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोदी ने ओबामा को अपना बहुत अच्छा दोस्त कहा। ओबामा भी बोले कि उन लोगों में अक्सर काफी देर फोन पर बातें होती हैं और वे इतना तक जानते हैं कि कौन कितने बजे और कितनी देर सोता है। सुपरपावर अमेरिका के प्रेसिडेंट के साथ ये रिश्ते भी भारत की छवि को अच्छा बनाने में एक बड़ा कदम हैं।

योग को बनवाया विश्व योग दिवस

मोदी ने 27 सितंबर 2014 को यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली में भाषण देते हुए कहा कि भारतीय योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाना चाहिए। मोदी की इस बात का 170 से भी अधिक देशों ने समर्थन भी किया।

इतना ही नहीं 11 दिसंबर 2014 को यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली ने 21 जून को विश्व योग दिवस के रूप में मनाने की घोषणा भी कर दी गई। भारतीय योग का विश्व योग दिवस के रूप में मनाया जाना भारतीय संस्कृति या यूं कहें कि ब्रांड इंडिया को वैश्विक पटल पर मजबूती मिलने जैसा है।

डिजिटल इंडिया शुरू किया

2011 के आंकड़ों के हिसाब से भारत में करीब 75 प्रतिशत लोग ही पढ़े-लिखे हैं। बावजूद इसके, मोदी ने डिजिटल इंडिया प्रोग्राम शुरू किया, ताकि देश की छवि को वैश्विक पटल पर अच्छा दिखाया जा सके।

अपनी जापान यात्रा के दौरान मोदी ने जापान के साथ मजबूत दोस्ती की बात कही थी और बोले थे- ये फेविकॉल से भी ज्यादा मजबूत जोड़ है। मोदी ने कहा था कि कुछ लोगों के बीच भारत की छवि सपेरों जैसी है। मोदी ने कहा कि पहले हम सांप से खेलते थे और अब माउस से खेलते हैं। वे बोले- जब हम माउस चलाते हैं तो दुनिया चलती है।

मोदी का डिजिटल इंडिया भले ही पूरे देश को इंटरनेट से जोड़ने की तैयारी में है, लेकिन देश की लचर ढांचागत सुविधाओं के चलते यह सपना सिर्फ शहरों तक ही सीमत होता दिख रहा है। अगर हर गांव तक डिजिटल इंडिया को पहुंचाना है तो पहले वहां तक ढांचागत सुविधाओं को पहुंचाना होगा।

मेक इन इंडिया शुरू किया

मेक इन इंडिया शुरू करके मोदी ने भारत में ही मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया। देश में मैन्युफैक्चरिंग से आयात घटेगा, जिससे भारत का विदेशी मुद्रा भंडार पर्याप्त बना रहेगा। वहीं दूसरी ओर, मेक इन इंडिया के कारण भारत में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ जाने पर भारत से निर्यात भी करने के मौके बनेंगे।

निर्यात के मौके बनने पर भारत में बनी हुई चीजें विदेशों तक फैलेंगी, जो ब्रांड इंडिया को बढ़ावा देंगी। इतना ही नहीं, मेक इन इंडिया देश में नौकरी की भी अपार संभावनाएं पैदा करेगा, जिससे बेरोजगारी में कमी आएगी, जो लोगों के स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग को भी बढ़ाएगा।

वहीं दूसरी ओर, रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने मोदी के मेक इन इंडिया की आलोचना करते हुए कहा था कि यह चीन के निर्यात केंद्रित वृद्धि मार्ग की नकल है। राजन के अनुसार इस स्कीम को मेक फॉर इंडिया होना चाहिए था, जो घरेलू बाजार के लिए उत्पाद बनाने पर केंद्रित हो।

राहत कार्यों में प्रमुख भूमिका

हाल ही में नेपाल में एक खतरनाक भूकंप आया था, जिसकी वजह से पूरे देश में 7000 से भी अधिक लोगों की मौत हो गई। पड़ोसी देश नेपाल को परेशानी से जूझता देख मोदी ने तुरंत जरूरी कदम उठाते हुए राहत कार्यों के लिए सेना और डॉक्टरों की टीम नेपाल भेज दी, जिसने ब्रांड इंडिया को मजबूती देने का काम किया।

इतना ही नहीं, मोदी सरकार ने यमन और सीरिया में आपात स्थिति आने पर वहां फंसे भारतीयों को निकालने के लिए भी मदद भेजी थी। मोदी के इन सभी कामों से ब्रांड इंडिया को मजबूत होने में सहारा मिला है।

सार्क देशों के प्रमुखों को बुलाया

मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में सार्क देशों के प्रमुखों को बुलाया था, ऐसा पहले कभी देखने को नहीं मिला है। इस तरह से अन्य देशों के प्रमुखों को आमंत्रित करना भी भारत की अच्छी छवि बनाने की दिशा में अच्छा कदम है।

ओबामा को बुलाया

शपथ ग्रहण के बाद मोदी ने गणतंत्र दिवस पर अमेरिका के प्रेसिडेंट बराक ओबामा को भी बुलाया था, जिसके बाद उन्होंने साथ में ही मिलकर प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। दोनों ने साथ मिलकर एक लेख भी लिखा और रेडियो पर मन की बात भी की।

स्वच्छता अभियान

मोदी ने पिछले साल 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन स्वच्छता अभियान की शुरुआत की। इस अभियान से आम जनता को जोड़ा जा सके, इसलिए उन्होंने कुछ चुनिंदा बड़े सेलेब्रिटी को इस अभियान से जोड़ा।

गंदगी को देश से हटाकर देश को साफ-सुथरा बनाने का मोदी को एक बड़ा फायदा यह भी दिखा कि इससे पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकेगा। भारत में गंदगी देखकर पर्यटक दूसरों से भी इसकी बात कहते थे, जिससे भारत की छवि खराब होती थी।

मोदी के स्वच्छता अभियान ने भी ब्रांड इंडिया को मजबूत करने में अहम योगदान अदा किया है। इससे न केवल देश में, बल्कि विदेश में भी भारत की अच्छी छवि बनेगी।

हालांकि, मोदी के इस स्वच्छता अभियान पर उस वक्त कई सवाल भी खड़े हुए थे, जब मीडिया में सफाई के नाम पर पहले पत्ते बिछाकर फिर उसी को साफ करने की खबरें छाई थीं।
विज्ञापन

निगेटिव असर

सिर्फ बोलने वाला इंसान

मोदी के भाषण और विदेश यात्राओं ने जहां एक ओर देश को फायदा पहुंचाया है, वहीं दूसरी ओर इन्हीं सब की वजह से एक नकारात्मक छवि भी बनी है। लाइव मिंट में छपी एक खबर के अनुसार कमोडिटी ट्रेडिंग गुरू और हेज फंड मैनेजर जिम रॉजर्स ने कहा है कि मोदी सिर्फ बोलते हैं, करते कुछ नहीं हैं। ऐसे में देखा जाए तो जिम रॉजर्स का मोदी के लिए ऐसा कहना ब्रांड इंडिया को एक बड़ा झटका है।

जिम ने कहा कि मोदी की सरकार जबसे सत्ता में आई है, तब से ही वह सिर्फ बातें कर रही है और उसने विदेशी निवेशकों को लुभाने के लिए कोई खास कदम नहीं उठाया है। जिम ने न सिर्फ बीजेपी बल्कि कांग्रेस पर भी हमला बोला और कहा कि ये दोनों ही राजनीति पार्टियां न पहले भारते के लिए अच्छी थीं और न ही कभी अच्छी हो सकती हैं।

भारत में बनी घुमक्कड़ की छवि

प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के 21 दिन बाद ही भले मोदी ने विदेशों की यात्रा विदेशी निवेशकों को लुभाने के लिए शुरू कर दी हो, लेकिन देश के एक बड़े तबके के मन में मोदी की छवि एक घुमक्कड़ की बन गई है।

ऐेसे में भले ही मोदी विदेशों में ब्रांड इंडिया को मजबूत कर रहे हों, लेकिन देश के एक बड़े तबके पर इसका नकारात्मक असर होता दिख रहा है। मोदी को इस तबके के बारे में सोचते हुए भी कुछ प्रभावी कदम उठाने की जरूरत होगी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें