राजनीति में स्थायी रूप से शत्रु और मित्र नहीं होते, झारखंड की नई सरकार इस फलसफे का बेहतर उदाहरण है।
2008 में यूपीए के सहयोग से 144 दिन सरकार चला चुके झामुमो सुप्रीमो शिबु सोरेन एक बार फिर यूपीए के पाले में लौट आए हैं और शनिवार को उनके बेटे हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
झारखंड में 13 सालों में ये 9वीं सरकार है।
विश्लेषकों की मानें तो 2014 लोकसभा चुनावों के मद्देनजर नए साथियों की तलाश में जुटी कांग्रेस के लिए ये गठजोड़ फायदे का सौदा है। हालांकि आशंका है तो केवल गठबंधन की उम्र को लेकर।
2005 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद से लेकर अब तक शिबु सोरेन भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के साथ गठबंधन कर चुके हैं लेकिन अब तक स्थायी सरकार नहीं दे पाए हैं।
हेमंत सोरेन की सरकार में कांग्रेस और राजद के विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ली है।
कांग्रेस और झामुमो की साझेदारी
कांग्रेस और झामुमो पहले भी सत्ता में साझेदारी कर चुके हैं। मार्च, 2005 में विधानसभा चुनाव में खंडित जनादेश आने के बाद कांग्रेस ने शिबु सोरेन की सरकार को बाहर से समर्थन दिया था। हालंकि ये सरकार महज नौ दिन ही चल पाई।
इसके बाद 27 अगस्त, 2008 को झामुमो मुखिया शिबू सोरेन ने यूपीए के समर्थन से सीएम पद की शपथ ली थी।
हालांकि 2009 में विधानसभा चुनाव नहीं जीत पाने के कारण शिबू सोरेन को जनवरी 2009 में पद से इस्तीफा देना पड़ा था। सोरेन 144 दिन तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हुआ था।
झामुमो केंद्र में भी यूपीए की साझीदार रह चुकी है। यूपीए की पहली सरकार में झामुमो शामिल हुई थी और शिबु सोरेन ने कोयला मंत्रालय का पद संभाला था। लेकिन 12 साल पुराने मामले में गिरफ्तारी का वारंट जारी होने के कारण उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था।