बाबरी मस्जिद 1527 में बनी और 1992 में ढहा दी गई। अयोध्या के रामकोट पहाड़ी पर बनी यह मस्जिद राम की जन्म भूमि के रूप में विवादित रही।
आजाद भारत में इस ऐतिहासिक विवाद का जन्म तब हुआ, जब 22-23 दिसंबर, 1949 की रात कथित तौर पर मस्जिद के अंदर चोरी-छिपे मूर्तियां रखी गईं। अगली सुबह अयोध्या पुलिस थाने में इसकी एफआईआर दर्ज कराई गई।
बाबरी मस्जिद के भीतर मूर्तियां रखे जाने की खबर सुनकर तत्कालीन प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरू ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत को यह निर्देश दिया कि वे मूर्तियों को हटा ले। हालांकि ऐसा हो नहीं सका।
1984 तक यह विवाद शांत रहा। 1984 में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने मस्जिद के ताले खुलवाने के लिए आंदोलन शुरू किया और 1985 में राजीव गांधी की सरकार ने अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद का ताला खोल देने का आदेश दिया।
इसके बाद क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव तब बहुत बढ़ गया जब नवंबर 1989 में लोक सभा चुनाव से पहले विहिप को विवादित स्थल पर शिलान्यास करने की अनुमति दी गई।
1992 में भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने एक रथ पर सवार होकर दक्षिण से अयोध्या तक की 10,000 किमी की यात्रा की शुरुआत की।
इस रथ यात्रा के फलस्वरूप देश भर से हजारों कारसेवक मंदिर निर्माण के मकसद से अयोध्या में इकट्ठा हुए। कारसेवकों के उन्माद में ही 6 दिसंबर 1992 को यह मस्जिद ढहा दी गई।